मुजफ्फरनगर। हिन्दुस्तान सिटी न्यूज

नलकूपों के संचालन के लिए ऑटोमाइजेशन व्यवस्था के टेंडर में जलकल विभाग के द्वारा बडा खेल किया गया है। जलकल विभाग के द्वारा पुरानी फर्म को टेंडर देने के लिए काफी हथकंडे अपनाए गए, लेकिन जब बात नहीं बन पायी तो नई फर्म के वर्कऑर्डर में पेंच फंसा दिया गया। निदेशालय से फोन आने पर डीएम ने संज्ञान लिया तो जलकल विभाग के द्वारा करीब डेढ माह की देरी से टेंडर खोला गया। पुरानी फर्म को लाभ देने के लिए कुछ ऐसा चक्रव्यू रचा गया, जिसमें टेंडर को नई फर्म को मिल गया, लेकिन अभी एक माह तक पुरानी फर्म की ऑटोमाइजेशन व्यवस्था संभालेंगी। इस पूरे प्रकरण में जलकल विभाग के एई की भूमिका संदिग्ध बनी हुई है। उनकी कार्य प्रणाली पर काफी सवाल उठ रहे है।
तत्कालीन चेयरमैन पंकज अग्रवाल द्वारा शहरी क्षेत्र के सभी नलकूपों को तकनीक से जोड़ते हुए यहां पर ऑटोमाइजेशन की शुरूआत की गई थी। इसके बाद चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल ने इस व्यवसथा को सुचारू रखा। पिछले करीब चार साल से नलकूप ऑटोमाइजेशन का कार्य प्रियांक इंटरप्राइजेज गाजियाबाद देख रही है। फर्म ने यहां पर स्काडा पैनल के माध्यम से सभी ट्यूबवैल का ऑटोमाइजेशन करते हुए पालिका मुख्यालय से सेंटर बनाकर उनको एक ही बटन से ऑपरेट करने की सुविधा शुरू कर दी थी। नगर पालिका प्रशासन के द्वारा इस बार नया ओपर टेंडर निकाला गया। ई टैण्डर में पांच फर्म आई और चार में से एक फर्म सर्वेस इंटरप्राइजेज प्रा. लि. लखनऊ एन-1 श्रेणी में स्वीकृत हो गई। जबकि पुरानी फर्म प्रियांक इंटरप्राइजेज के अंशुल और इंन्द्र ने आरोपों का ऐसा दौर शुरू किया कि हंगामा मच गया। मामला डीएम, कमिश्नर और प्रमुख सचिव तक पहुंचा है। कमिश्नर के द्वारा अपर आयुक्त को जांच सौपी गई है। टेंडर स्वीकृत होने के बाद वर्कऑर्डर न मिलने पर नई फर्म सर्वेस के मालिक ने इस मामले की शिकायत निदेशालय, प्रमुख सचिव आदि से की। शिकायत होने पर आनन फानन में नई एल-1 फर्म सर्वेस इंटरप्राइजेज को जलकल विभाग की ओर से नलकूपों का ऑटोमाइजेशन का ठेका स्वीकृत करते हुए वर्कऑर्डर दिया गया, लेकिन इसमें बडा खेल रच दिया गया। नई फर्म को वर्कऑर्डर इस शर्त पर दिया गया है कि वह जुलाई माह से काम करेंगी। जलकल विभाग के अधिकारियों के द्वारा पुरानी फर्म को लाभ देने के लिए ऐसा किया गया है। बताया जाता है कि एई जलकल अनुज कुमार के कहने पर पुरानी फर्म ने ऑटोमाइजेशन को और बेहतर तकनीक से जोड़ते हुए करीब 20-25 लाख खर्च कर नया सॉफ्टवेयर लगाया है, उम्मीद थी कि इस बार भी टैण्डर उनको ही हो जायेगा, लेकिन इस बार नियमों को ताक पर रखते हुए टैण्डर में ऐसी शर्तें लगाई गई, जो संदिग्ध हैं।

ईओ डा. प्रज्ञा सिंह ने बताया
शासन और प्रशासन के निर्देश पर पूरे प्रकरण की जांच कराई जा रही है। एई से रिपोर्ट तलब की गई है। विभागीय स्तर पर नई एल-1 फर्म सर्वेस इंटरप्राइजेज को नगरपालिका के सभी ट्यूबवैल के ऑटोमाइजेशन के कार्य के लिए वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया है, लेकिन इसमें एक जुलाई से कार्य करने की शर्त शामिल है। तब तक पुरानी फर्म प्रियांक इंटरप्राइजेज ही काम करेगी।
डा. प्रज्र्ञा ंसह, ईओ नगर पालिका
एई जलकल अनुज कुमार ने बताया
शहरी क्षेत्र में फिलहाल 81 में से 70 नलकूप ऑटोमाइजेशन से जुड़े हुए हैं। टैण्डर प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी रही है। पांच फर्मों ने इस ई टैण्डर में प्रतिभाग किया था। एक फर्म द्वारा वित्तीय निविदा में डीडी और जमानत राशि के दस्तावेज नहीं लगाये थे, जिस कारण उसको अयोग्य घोषित किया गया। सर्वेस इंटरप्राइजेज एल-1 श्रेणी की फर्म को वर्क ऑर्डर जारी किया गया है। जेई से इस सम्बंध में विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
अनुज कुमार, एई जलकल
अपर आयुक्त ने ईओ को पत्रावलियों के साथ बुलाया
मुजफ्फरनगर। अंशुल सिंह प्रियांक ऑटोमेशन के प्रार्थना पत्र पर अपर आयुक्त प्रशासन ने नगर पालिका ईओ को चार जून में संबंधित पत्रावलियों के साथ बुलाया था, लेकिन इस दौरान ईओ उपस्थित नहीं हो पायी है। अब फिर से अपर आयुक्त ने ईओ डा. प्रज्र्ञा ंसह को 9 जून को संबंधित पत्रावलियों के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिए है।



