मुजफ्फरनगर। हिन्दुस्तान सिटी न्यूज

शासन स्तर पर मच्छर भगाने वाली कई अगरबत्तियों की जांच कराने पर डाइमेफ्लुथ्रिन और मेपरफ्लुथ्रिन रसायन पाया गया है। यह दोनों रसायन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने दोनों रसायन युक्त मच्छर अगरबत्तियों की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई है। वहीं चेतावनी दी है कि यदि प्रतिबंधित अगरबत्तियों की बिक्री की गई तो संबंधित के खिलाफ कडी कार्रवाई होगी।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी राहुल तेवतिया ने बताया कि मच्छरों को भगाने वाली जिन अगरबत्तियों में डाइमेफ्लुथ्रिन और मेपरफ्लुथ्रिन रसायन है वह स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है। उन्होंने बताया कि शासन स्तर से ऐसी अगरबत्तियों की बिक्री को प्रतिबंधित कर दिया गया है। उन्होंने अगरबत्तियों को आम नागरिको, कीटनाशी प्रतिष्ठानों / पेस्ट कंट्रोल ओपरेटर्स/किराने की दुकान/गोदाम मालिकों को इन उत्पादों के उपयोग, बिक्री एवं भण्डारण से बचने की अपील की है। उक्त ब्राण्डों की अगरबत्तियों का प्रचार हर्बल, प्राकृतिक और ऑर्गेनिक उत्पादों के रूप में किया जाता है, लेकिन विभिन्न राज्यों की राजकीय प्रयोगशालाओं तथा भारत सरकार की केन्द्रीय प्रयोगशालों में कराई गई जॉच में इनमें डाइमेफ्लुथ्रिन और मेपरफ्लुथ्रिन जैसे अपंजीकृत कीटनाशकों के उपयोग की जानकारी सामने आई है। इन रसायनों का लगातार सम्पर्क मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। जैसे फेफडों, मस्तिष्क, किडनी, पेट और हृदय से सम्बन्धित गंभीर सवास्थ्य समस्याओं की आशंका बढ़ सकती है। उन्होंने अपील की है कि इन ब्राण्डों की अगरबत्तियों का प्रयोग न करें। सभी कीटनाशी प्रतिष्ठानों/पेस्ट कंट्रोल ऑपरेटर्स /किराने की दुकान / गोदाम मालिकों एवं कीटनाशक विक्रेताओं को निर्देशित किया गया है कि वे इन उत्पादों का क्रय-विक्रय विभागीय निरीक्षण के दौरान उक्त ब्राण्ड की अगरबत्ती पायी जाती है तो सम्बन्धित के विरूद्ध जो कीटनाशी अधिनियम 1968 एंव नियमावली 1971 के अन्तर्गत वैधानिक कार्यवाही की जायेगी।






