मुजफ्फरनगर। हिन्दुस्तान सिटी न्यूज

गुरुवार को मेरठ रोड स्थित एक रेस्टोरेट में संयुक्त संघर्ष समिति ने रजिस्ट्रेशन विभाग की नई नीतियों के विरोध में प्रेसवार्ता की है। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर के तहसील मुख्यालयों पर चल रहा दस्तावेज लेखक एवं स्टांप विक्रेताओं का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। यह आंदोलन अब केवल दस्तावेज लेखकों और स्टांप विक्रेताओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि आम, मध्यमवर्गीय, ग्रामीण और मजदूर वर्ग के लोगों की समस्याओं से भी जुड़ गया है। संयुक्त संषर्घ समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि सरकार इस मामले में सुनवाई नहीं करती है तो फिर हाईकोर्ट जाएगे।
संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष एडवोकेट योगेंद्र कांबोज ने कहा कि आंदोलन से संबंधित मांगों का ज्ञापन नगर विधायक एवं राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल, मंत्री अनिल कुमार तथा जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा गया है। ज्ञापन में मुख्यमंत्री से मामले का स्वयं संज्ञान लेकर प्रभावित लोगों को राहत देने और शीघ्र हस्तक्षेप करने की मांग की गई है। समिति का कहना है कि नई दस्तावेज लेखन एवं पंजीकरण नीति से इस क्षेत्र से जुड़े हजारों लोगों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। पूरी तरह पेपरलेस व्यवस्था लागू होने से आम लोगों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। पंजीकरण पोर्टल पर तकनीकी समस्याओं और सीमित स्पेस के कारण रजिस्ट्रियों का कार्य प्रभावित हो रहा है, जिससे सरकारी राजस्व पर भी असर पड़ रहा है। समिति ने ऑनलाइन भुगतान के साथ पुरानी भुगतान व्यवस्था को भी जारी रखने तथा ऑनलाइन आवेदन की वैधता अवधि बढ़ाकर 120 दिन करने की मांग की है। समिति ने रियल टाइम खतौनी व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि नई प्रणाली के कारण जनता का खर्च और परेशानी बढ़ी है। तैयार की जा रही खतौनियों में बड़ी संख्या में त्रुटियां सामने आ रही हैं। इन त्रुटियों के समयबद्ध समाधान के लिए कानूनगो, तहसीलदार और उप जिलाधिकारी स्तर पर समय सीमा निर्धारित करने तथा एक अलग ऑनलाइन पोर्टल विकसित करने की मांग की गई है। पंजीकरण के बाद दस्तावेजों के सुरक्षित संरक्षण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। समिति का कहना है कि मूल दस्तावेज खो जाने या नष्ट होने की स्थिति में प्रमाणित प्रतिलिपि प्राप्त करना कठिन होता है। इसलिए पुराने और नए सभी दस्तावेजों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर उन्हें ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाना चाहिए। स्टांप व्यवस्था को लेकर समिति ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन प्रणाली लागू होने के बाद स्टांप विक्रेताओं का कमीशन कम कर दिया गया है, जबकि निजी कंपनी को यह कार्य सौंपे जाने के कारण विक्रेताओं को अतिरिक्त संसाधनों पर खर्च करना पड़ रहा है। इससे हजारों लोगों की आजीविका प्रभावित हो रही है। इस दौरान हाजी कमरूज्जमा, एडवोकेट हेमंत अरोरा, एडवोकेट संजय शिवम, एडवोकेट मनोज पाल, रवी जैन, किशनचंद कांबोज, रंजीत त्यागी, अशोक त्यागी, कुलदीप गुप्ता, शशिकांत शर्मा, अभिनव मुद्गल, अशोक माहेश्वरी, विजय कुमार, नूर मोहम्मद आदि मौजूद रहे।






