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देवभूमि के सांस्कृतिक की सुरक्षा, संरक्षा व परम्पराओं की रक्षा के लिए हमारी सरकार ने लैंड जिहाद, लव जिहाद, थूक जेहाद पर लिए सख्त फैसले: पुष्कर सिंह धामी

 

मुजफ्फरनगर। हिन्दुस्तान सिटी न्यूज

रामपुर तिराहा कांड की 31वीं बरसी पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुजफ्फरनगर स्थित रामपुर तिराहा शहीद स्मारक पर उत्तराखंड आंदोलन के बलिदानियों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार ने देवभूमि का धार्मिक और सनातन स्वरूप बचाने के साथ ही यहां संस्कृति के संरक्षण और धर्म आधारित परम्पराओं की सुरक्षा के लिए कई सख्त फैसले लिए हैं। इनमें लैंड, लव और थूक जिहाद पर अंकुश लगाने के साथ ही सीएए और दंगा निरोधी कानून को लागू करना भी शामिल है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को रामपुर तिराहा स्थित स्मारक पर पहुंचकर उत्तराखंड आंदोलन के बलिदानियों को याद करते हुए नमन किया और श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके साथ ही सभा स्थल पर सीएम धामी द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर उनके चित्र के समक्ष श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनको याद किया।
शहीद स्मारक पर सभा को सम्बोधित करते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य आन्दोलनकारी शहीदों के साथ ही रामपुर तिराहा गोलीकांड में अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके अदम्य साहस भरे संघर्ष एवं बलिदान को नमन करते हुए कहा कि राज्य आन्दोलनकारियों के बलिदान से ही उत्तराखण्ड राज्य का निर्माण संभव हो सका है। इन शहीदों ने भविष्य बनाने के लिए अपना वर्तमान बलिदान कर दिया। हमारी सरकार आन्दोलनकारियों और शहीदों के परिजनों के कल्याण हेतु निरंतर संकल्पित है तथा उनके हितों और सम्मान की रक्षा के लिए हर संभव कार्य कर रही है। इन आंदोलनकारियों के अदम्य साहस, बलिदान और संघर्ष के परिणामस्वरूप ही उत्तराखण्ड के रूप में पृथक राज्य का गठन संभव हुआ। इस राज्य की नींव में इन शहीदों के रक्त की आहुति शामिल है। हमारी सरकार अमर शहीदों के सपनों के अनुरूप प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए पूर्ण समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
सीएम धामी ने कहा कि इन शहीदों को सपना था कि इस देवभूमि के मूल स्वरूप की सुरक्षा से कोई छेड़छाड़ न हो, वो हमेशा देवभूमि के अस्तित्व को बचाने के लिए चिंतित रहे, उनका मत रहा कि यहां पर सभी के लिए समान व्यवस्था लागू की जाये, इसके लिए ही हमने राज्य में समान नागरिकता कानून को लागू किया। देवभूमि के सांस्कृतिक और धार्मिक स्वरूप की सुरक्षा, संरक्षा और यहां की परम्पराओं की रक्षा के लिए हमारी सरकार ने लैंड जिहाद, लव जिहाद और थूक जेहाद पर सख्त फैसले लिए हैं। इसके तहत हरी चादर बिछाकर मजार बनाकर सरकारी भूमि को कब्जाने वाले लोगों के खिलाफ बड़ी कार्यवाही हुई और लैंड जिहाद के खिलाफ चले इस अभियान में सरकार ने अभी तक 9 हजार एकड़ भूमि को लैंड जिहादियों से मुक्त कराया। इस कार्यवाही में सरकारी भूमि पर बने 550 मजारों और दो मस्जिदों को हटाया गया। दंगा निरोधी कानून बनाकर दंगाइयों से ही नुकसान की भरपाई की व्यवस्था कराई है। मदरसा बोर्ड की कबिलाई संस्कृति वाली शिक्षा को हटाने के लिए बोर्ड को समाप्त किया और 250 से ज्यादा अवैध मदरसों को बंद कराये गये। अब एक जुलाई 2026 से हमारी सरकार उत्तराखंड में कवेल उन्हीं मदरसों को मान्यता देने का काम करेगी, जो सरकार द्वारा निर्धारित राज्य शिक्षा नीति में स्वीकृत पाठयक्रम को अपने यहां पर लागू करेंगे।
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमारी सरकार ने देवभूमि में धार्मिक भावनाओं के साथ, आस्था लेकर आने वाले लोगों को धर्म के नाम पर ठगकर सनातन संस्कृति को बदनाम करने वाले पाखंड़ी बाबा और साधु-संतों के खिलाफ भी कार्यवाही की और कालनेमि अभियान चलाकर ऐसे पाखंड पर भी अंकुश लगाने का काम किया है। इसके सहारे धार्मिक भवनाओं की रक्षा की जा रही है। इसके साथ ही भ्रष्टाचार के प्रति भी हमारी सरकार ने जीरो टोलरेंस की नीति पर काम किया है। पहले भ्रष्टाचार के मामलों में केवल छोटी मछलियों पर ही कार्यवाही की बात सामने आती थी, लेकिन हमारी सरकार ने बड़े मगरमच्छ भी पकड़े हैं। 3 वर्षों में उत्तराखंड सरकार ने भ्रष्टाचार के मामलों में 200 से अधिक लोगों को जेल पहुंचाने का काम किया है, जिनमें आईएएस और पीसीएस कैडर के अधिकारी भी शामिल हैं। हमारी सरकार शहीदों का सपना पूर्ण करते हुए विकल्प रहित संकल्प के साथ उत्तराखंड को भारत का श्रेष्ठ राज्य बनाने का प्रयास कर रही है, इसी कड़ी में देश पहला कठोर नकल विरोधी कानून हमने लागू किया है। उन्होंने कहा कि शहीदों के प्रति हमारी सरकार कृतज्ञ है। राज्य आंदोलनकारियों और शहीद परिवारों के हितों के लिए सरकार ने बड़े काम किये हैं। सरकारी नौकरियों में आरक्षण, मासिक पेंशन, बच्चों को निःशुल्क शिक्षा, निःशुल्क यात्रा व्यवस्था, इन परिवारों की तलाकशुदा और विधवा बेटियों को भी सरकारी नौकरी हमारी सरकार दे रही है।
इस अवसर पर मुख्य रूप से उत्तराखंड सरकार के धर्म व संस्कृति, लोक निर्माण, सिंचाई एवं पंचायती राज विभाग के मंत्री सतपाल महाराज, यूपी सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अनिल कुमार, राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार कपिल देव अग्रवाल, पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान, विधायक रुड़की प्रदीप बत्रा, विधायक खानपुर उमेश कुमार, विधायक झबरेड़ा विरेन्द्र जाति, रुड़की नगर निगम के मेयर ललित मोहन अग्रवाल, गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष राजेन्द्र अणथवाल, राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद् के अध्यक्ष सुभाष बड़थवाल, उत्तराखंड संस्कृति एवं साहित्य कला परिषद् की उपाध्यक्ष मधु भट्ट, भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. सुधीर सैनी, संस्कृति सचिव योगेन्द्र किशोर पन्त, राज्य आंदोलनकारी कमला भमोला, रिषीप्रकाश काला, त्रिलोक भट्ट, पूर्व विधायक अशोक कंसल, भाकियू नेता विकास शर्मा सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

संजीव बालियान ने न्याय की राह को किया आसान
मुजफ्फरनगर। रामपुर तिराहा कांड की बरसी पर शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि सभा के दौरान उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विशेष तौर पर पूर्व मंत्री डॉ. संजीव बालियान के उन प्रयासों को सार्वजनिक करते हुए आभार जताया, जिसमें उनके द्वारा रामपुर तिराहा गोलीकांड के पीड़ितों को न्याय मिलने का रास्ता साफ हुआ।
मंच पर सभा के दौरान सीएम धामी ने कहा कि रामपुर तिराहा कांड घटना उत्तराखंड समेत देश के इतिहास में काला अध्याय है। सपा सरकार में यह क्रूर घटना घटी। इसके लिए जनता कभी उन्हें माफ नहीं करेगी। शांतिपूर्ण चल रहे राज्य आंदोलन को बर्बरता से कुचला गया। यह घटना जलियांवाला बाग हत्याकांड से भी ज्यादा क्रूर थी। न्यायालय ने भी अपने फैसले के दौरान की गई टिप्पणी में इसे माना है। यह सपा सरकार की दमनकारी नीति का हिस्सा रही, इसकी शुरूआत एक सितम्बर 1992 को खटीमा और इसके अगले दिन मसूरी गोलीकांड से हो चुकी थी। 2 अक्टूबर 1994 की रात को मानवता की सारी हदों को तोड़ा गया। रामपुर तिराहा कांड पर निहत्थों पर गोलियां चलाई गई और महिलाओं की आबरू को लूटा गया। इसमें न्याय पाने के लिए लोग आस भी छोड़ चुके थे, लेकिन हमारी सरकार न्याय दिलाने के लिए कृत संकल्प थी। डॉ. संजीव बालियान ने केन्द्र में मंत्री और मुजफ्फरनगर से सांसद रहते हुए इन मुकदमों की पैरवी को मजबूत बनाने के लिए हमारा सहयोग किया और न्याय मिलने का रास्ता साफ हुआ।
वहीं पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान ने अपने संबोधन में पुष्कर सिंह धामी की सरकार की उपलब्धियों को सराहनीय बताते हुए कहा कि शहादत से ही उत्तराखंड का जन्म हुआ है। ये तिराहा ही दोनों राज्यों को गहरे सम्बंध में बांधता है। इस कांड के बाद भी दोनों राज्यों में आपसी भाईचारे और लगाव का रिश्ता पहले की भांति ही मजबूत है। 31 साल पहले आज ही के दिन वो काला अध्याय लिखा गया, जो कोई याद करना नहीं चाहता। 30 साल तक पीड़ितों ने मुकदमे लड़े और अब न्याय मिलना प्रारम्भ हुआ, ये धामी सरकार की शहीदों के प्रति संकल्प को प्रदर्शित करता है। भयंकर आपदाओं के बावजूद भी उत्तराखंड विकास की राह पर खड़ा नजर आता है, यह धामी सरकार की नीति को साबित करता है। उन्होंने राज्य हित में सीएए, अवैध मजार, मजिस्द और मदरसे हटाने, रूढीवादी शिक्षा व्यवस्था को हटाने जैसे कई सख्त फैसले लेकर साबित किया है कि वो कर्म प्रधान नीति के पक्षधर हैं। उन्होंने शहीदों को न्याय दिलाने का काम किया है।

शहीद स्मारक का होगा रि-डवलपमेंट, बनेगी कैंटीन

मुजफ्फरनगर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रामपुर तिराहा कांड के बाद यहां के आसपास के लोगों ने पीड़ितों की मदद के लिए इंसानियत को जीवित रखा है और यह स्मारक जहां शहीदों के बलिदान का साक्षी है तो वहीं इंसानियत और भाईचारे की कहानी को भी बयां करता है। हमारी सरकार ने अब इस शहीद स्मारक का रि-डवलपमेंट प्लान बनाने का काम शुरू किया है। इसको भव्य स्वरूप दिया जायेगा। उन्होंने रामपुर तिराहा गोलीकांड शहीद स्मारक के विकास की नई योजनाओं की घोषणा करते हुए कहा कि संस्कृति विभाग इसके पुनःविकास का खाका बना रहा है। इसके साथ ही यहां पर एक भव्य कैंटीन की स्थापना होगी। साथ ही रामपुर तिराहा पर उत्तराखंड की सभी सरकारी बसों के लिए एक विशेष ठहराव की व्यवस्था की जायेगी, ताकि इन बसों में सफर करने वाले लोगों को यहां पर कुछ देर विश्राम के कराने के साथ शहीदों के बारे में अवगत कराने की व्यवस्था की जायेगी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने रामपुर, सिसौना और बागोवाली गांवों में दोनों राज्यों के बीच मैत्री बढ़ाने के उद्देश्य से जन मिलन केन्द्र बनाने का निश्चय किया है।

रामपुर तिराहा स्मारक पर दानदाता महावीर प्रसाद की प्रतिमा का अनावरण
मुजफ्फरनगर। 2 अक्टूबर 1994 की रात को दिल्ली राज्य आंदोलन में प्रतिभाग करने जा रहे राज्य आंदोलनकारियों की बसों को रोका गया और फिर संघर्ष में पुलिस की गोलियों से सात आंदोलनकारी शहीद हो गये। यहां पर महिलाओं के साथ बलात्कार किये जाने के आरोप भी लगे हैं। संकट के ऐसे समय में स्थानीय निवासी महावीर प्रसाद शर्मा ने अपनी पत्नी स्व. संतोष देवी और ग्रामीणों के साथ मिलकर आगे आकर बड़े पैमाने पर पीड़ितों की मदद की और गोलीकांड के मुकदमों में पुलिस व प्रशासन के अफसरों के खिलाफ उत्तराखंड सरकार की ओर से सीबीआई के गवाह भी बने। उन्होंने शहीद स्मारक के लिए अपनी डेढ़ बीघा भूमि संस्कृति विभाग उत्तराखंड को दान दी। उनकी भूमि के साथ संस्कृति विभाग ने करीब साढ़े सात बीघा भूमि पर रामपुर तिराहा गोलीकांड शहीद स्मारक का निर्माण कराया। गुरुवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भूमि दान कर्ता स्व. महावीर प्रसाद शर्मा की शहीद स्थल पर लगाई गई प्रतिमा का अनावरण किया।
संस्कृति सचिव उत्राखंड युगल किशोर पन्त ने बताया कि इस शहीद स्थल पर मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने भी 2024 में 30वीं बरसी पर मूर्ति स्थल निर्माण का शिलान्यास किया था। यहां महावीर प्रसाद शर्मा की मूर्ति निर्माण व स्थल सौन्दर्यकरण का कार्य उत्तराखंड सरकार ने कराया है। कार्यदायी संस्था ग्रामीण निर्माण निगम प्रखण्ड हरिद्वार के द्वारा 14.75 लाख रुपये के खर्च पर महावीर प्रसाद शर्मा की मूर्ति स्थापित की गई है। इस दौरान सीएम धामी के साथ ग्रामीण निर्माण निगम विभाग के मंत्री सतपाल महाराज, महावीर प्रसाद शर्मा के पुत्र अनिरुद्ध उर्फ पप्पू शर्मा, अलका शर्मा, शहीद स्माकर प्रभारी उनके छोटे पुत्र शुभम शर्मा, हिमानी शर्मा और पोती मोहिनी शर्मा मौजूद रहे। मंच पर पप्पू शर्मा व उनकी पत्नी अलका शर्मा ने सीएम धामी को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। पप्पू शर्मा ने कहा कि उनके पिता ने इंसानियत को जीवित रखने के लिए भूमि दान की और उनके संकल्प को पूरा परिवार उत्तराखंड राज्य की सेवा के लिए समर्पित रहेगा।

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