लखनऊ/नोएडा। उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा प्राधिकरण से जुड़े करीब ₹3,800 से ₹4,000 करोड़ के लीजबैक मामले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए वरिष्ठ PCS अधिकारी हरीश चंद्र को सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया है। नियुक्ति विभाग ने 28 सितंबर 2026 को उनकी बर्खास्तगी का आदेश जारी किया। हरीश चंद्र वर्तमान में पश्चिम बंगाल के कोलकाता में खाद्य एवं रसद विभाग में स्थानिक प्रतिनिधि के पद पर तैनात थे।

हरीश चंद्र मुजफ्फरनगर में भी अपर जिलाधिकारी (ADM) के पद पर तैनात रह चुके हैं। वर्ष 2018 में मुजफ्फरनगर में तैनाती के दौरान भी वह निलंबित हुए थे।

क्या था मामला?
मामला वर्ष 2011 में नोएडा प्राधिकरण में हरीश चंद्र की सचिव पद पर तैनाती के दौरान का है। विभागीय जांच में ग्राम शहदरा के सेक्टर 140-ए, 141, 142 और 143 के आसपास प्राधिकरण की करीब 3,81,527 वर्गमीटर अर्जित भूमि के नियमों के विपरीत लीजबैक का मामला सामने आया।
जांच के अनुसार इस जमीन की बाजार कीमत करीब ₹3,800 करोड़ आंकी गई थी, जबकि शासनादेश और विभिन्न रिपोर्टों में मामले की राशि करीब ₹4,000 करोड़ बताई गई है।
नियमों के मुताबिक लीजबैक की सुविधा संबंधित गांव के पात्र किसानों के लिए थी और एक परिवार को अधिकतम 450 वर्गमीटर तक भूमि लीजबैक किए जाने का प्रावधान था। आरोप है कि इसके बावजूद गांव के गैर-निवासी लोगों और निजी कंपनियों के नाम बड़े भूखंडों का लीजबैक किया गया। जांच में करीब 175 वर्गमीटर से लेकर 15,340 वर्गमीटर तक के भूखंडों का उल्लेख सामने आया।
जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि आबादी के सर्वे के दौरान जरूरी तथ्यों को छिपाया गया और संबंधित समितियों एवं अधिकारियों के समक्ष भ्रामक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। जांच में तत्कालीन सचिव हरीश चंद्र की भूमिका को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
मामले में 27 सितंबर 2013 को विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई शुरू की गई थी। बाद में जांच नोएडा प्राधिकरण की तत्कालीन CEO रितु माहेश्वरी को भी सौंपी गई।
शासन के अनुसार, विभागीय जांच में आरोप सिद्ध पाए जाने, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की 6 जनवरी 2022 की सहमति तथा इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के 3 सितंबर 2026 के आदेश में सामने आए तथ्यों के आधार पर अब हरीश चंद्र को सेवा से बर्खास्त करने का फैसला लिया गया है।






