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शहर की पेयजलापूर्ति को रोकना ठेकेदार को पडा भारी, पालिका ने जब्त की करीब 13 लाख की एफडीआर

मुजफ्फरनगर। हिन्दुस्तान सिटी न्यूज

शहर की पेयजलापूर्ति ठप करने वाले ठेकेदार के खिलाफ नगर पालिका प्रशासन ने कडा रूख अपनाया है। जलकल विभाग के एई अनुज कुमार ने कार्रवाई करते हुए उक्त ठेकेदार की करीब 13 लाख की एफडीआर को जब्त कर लिया है। वहीं नई और पुरानी फर्मों के मालिकों को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है।
शहरी क्षेत्र में 81 नलकूपों में से 70 नलकूप स्काडा ओटोमेशन सिस्टम से चल रहे है। बुधवार को स्काडा ओटोमेशन सिस्टम को हैक कर सर्वर डाउन कर दिया गया, जिससे सभी 70 नलकूप का संचालन नहीं होने के कारण पेयजलापूर्ति ठप हो गई। करीब 24 घंटे तक आपूर्ति नहीं होने का आरोप लगाते हुए गुरूवार को सभासद राजीव शर्मा, मनोज वर्मा, रजत धीमान, रविकांत शर्मा और शौकत अंसारी ने ईओ को लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए जांच और कार्रवाई की मांग की। ईओ पवन कुमार के निर्देश पर एई ने जांच शुरू की। एई अनुज कुमार ने बताया कि प्रथम दृष्टया जांच में यह सामने आया है कि पुरानी फर्म प्रियांग इंटरप्राजेज प्रा.लि. गाजियाबाद के मालिकों अंशुल सिंह और इंद्रकुमार के द्वारा जानबूझकर स्काडा ऑटोमेशन सिस्टम को हैक कर सर्वर डाउन किया गया। जिस कारण सभी नलकूपों का संचालन बंद हो गया और पेयजलापूर्ति ठप होने से चौतरफा हाहाकार मच गया। इसके साथ ही सिस्टम के संचालन के लिए नई फर्म सर्वेश इंटरप्राइजेज प्रा. लि. लखनऊ को लापरवाही के लिए नोटिस जारी कर फर्म मालिक सर्वेश सिंह को भी नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। एई अनुज कुमार ने बताया कि प्रियांक इंटरप्राइजेज की जमानत राशि करीब 13 लाख रुपये की एफडीआर को जब्त कर लिया गया है। इसके अलावा जांच रिपोर्ट आने पर आगामी कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी।

टेंडर को लेकर दोनों फर्म के बीच चल रहा विवाद, नहीं हुआ खत्म
मुजफ्फरनगर। वर्ष 2015 से पहले तक शहरी क्षेत्र में पेयजलापूर्ति के लिए सभी नलकूप मानव संसाधन पर आधारित थे। उन्हें मैनुअली चलाए जाने की व्यवस्था थी। तत्कालीन चेयरमैन पंकज अग्रवाल ने स्काडा ओटोमेशन सिस्टम की शुरूआत की। उनके काल में टैंडर निकले तो अंशुल सिंह और इंद्र कुमार की फर्म मैसर्स प्रियांक इंटरप्राइजेज प्रा. लि. गाजियाबाद को यह जिम्मेदारी मिली। उन्होंने पालिका में स्काडा ओटोमशन सिस्टम लगाया और तभी से ट्यूबवैल ऑनलाइन सिस्टम के अधीन आ गये। वर्ष 2025 में इसके लिए नया टैंडर निकाला गया। इसमें पांच फर्म ने भागीदारी की, एल-1 श्रेणी की शर्त पूरी करने वाली नई कंपनी सर्वेस इंटरप्राइजेज प्रा. लि. लखनऊ को टैंडर स्वीकृत हुआ, लेकिन समय से वर्क ऑर्डर नहीं मिलने पर फर्म मालिक सर्वेस सिंह ने मंडलायुक्त को शिकायत की। अपर नगरायुक्त राकेश यादव ने जांच बैठा दी, तो आनन फानन में जलकल विभाग ने सर्वेस सिंह को वर्क ऑर्डर जारी किया, लेकिन उनको एक जुलाई से कार्य शुरू करने की शर्त के साथ, ऐसे में अंशुल और इंद्र की कंपनी 2026 में तीन माह तक कार्य करती रही। इसमें विभागीय अधिकारियों की धांधली शामिल रही। दबाव में सर्वेस को कार्य तो दिया गया, लेकिन विवाद अभी भी चल रहा है।

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