मुजफ्फरनगर। हिन्दुस्तान सिटी न्यूज

जानसठ के गांव जंचेडी निवासी सौरभ शर्मा के पॉली हाउस का गुलाव दिल्ली की मंडियों में महक रहा है। सौरभ शर्मा ने पॉली हाउस निर्माण में 844 रुपए प्रति वर्ग मीटर की दर से कुल 33,76,000 रुपए का व्यय किया है। गुलाब के साथ उसने अन्य फसलों का भी उत्पादन किया है।
सौरभ शर्मा अन्य सामान्य किसानों की भांति कई वर्षों से पारंपरिक खेती पर ही निर्भर था। अपने खेतों में पारंपरिक रूप से गन्ना, गेहूं और धान की फसलें उगाया करता था। मेहनत तो भरपूर होती थी, लेकिन मौसम की अनिश्चितता, फसलों की बढ़ती लागत और बाजार के उतार-चढ़ाव के कारण मुनाफा बेहद सीमित रहता था। वर्ष 2022-23 में उद्यान विभाग के अधिकारियों के माध्यम से उसे संरक्षित खेती यानी पॉली हाउस तकनीक के विषय में जानकारी प्राप्त हुई। अधिकारियों ने समझाया कि कैसे कम क्षेत्रफल में अत्याधुनिक तकनीक का प्रयोग करके सालभर उच्च गुणवत्ता वाली फसलें उगाई जा सकती है। लागत, योजना और सरकारी सहयोग उद्यान विभाग के मार्गदर्शन में सौरभ ने अपने खेत में 4,000 वर्ग मीटर (लगभग 1 एकड़) में पॉली हाउस निर्माण और उसमें डच रोज (गुलाब) पुष्प उत्पादन का निर्णय लिया। गुलाब पुष्प उत्पादन डच रोज की खेती की शुरुआत हेतु 450 प्रति वर्ग मीटर की दर से 18 लाख की लागत आई। इस प्रकार संपूर्ण प्रोजेक्ट की कुल 51.76 लाख की लगात आयी। योजना के तहत उद्यान विभाग द्वारा कुल लागत पर 50 प्रतिशत का भारी अनुदान (सब्सिडी) प्रदान किया गया, जो लगभग 25,88,000 की सहायता राशि थी।
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खेती का सफर गुलाब से शिमला मिर्च तक
मुजफ्फरनगर। सौरभ ने बताया कि 4000 वर्ग मीटर के इस पॉली हाउस में जब डच रोज के पौधे रोपे गए तो केवल 50 दिनों के भीतर ही मनमोहक गुलाब के फूलों का उत्पादन शुरू हो गया। उत्पादन और विपणन प्रतिदिन लगभग 3,000 से 3,500 उच्च गुणवत्ता वाले गुलाब के फूल प्राप्त होने लगे। स्थानीय तथा दिल्ली की मंडियों में इन फूलों की बहुत भारी मांग रही। जहाँ प्रति पुष्प 5 से 8 रुपए (तथा त्योहारों एवं लगन के सीजन में इससे भी अधिक) का भाव मिला। गुलाब के साथ-साथ पॉली हाउस में उत्तम किस्म के टमाटर, शिमला मिर्च की खेती भी की।







