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एई ने बिना अनुमति के बदल दी थी टेंडर की शर्ते और बदलवा दिया साफ्टवेयर

मुजफ्फरनगर। हिन्दुस्तान सिटी न्यूज

नलकूपों के ऑटोमेशन प्रकरण में नगर पालिका के जलकल विभाग का एक बडा चौकाने वाला मामला सामने आया है। जलकल विभाग ने चेयरपर्सन और ईओ की स्वीकृति लिए बिना ही नलकूपों के ऑटोमेशन टेंडर प्रक्रिया में शर्तों को बदल दिया गया। वहीं दोनों को अंधेरे में रखकर पत्रावलियों पर हस्ताक्षर भी करा लिए। इतना ही नहीं बिना अनुमति लिए पुरानी फर्म से साफ्टवेयर भी बदलवा दिया। इस पूरे प्रकरण में जलकल विभाग के एई पर सवाल उठ रहे। उनके इस कारनामे की चर्चा अब नगर पालिका में सरेआम होने लगी है। सूत्रों की माने तो इस पूरे प्रकरण में एई जलकल समेत कई की गर्दन बुरी तरह से फंसी हुई है। सहीं तरह से जांच हुई तो उक्त अधिकारियों पर कार्रवाई तय है।
नगर पालिका के 55 वार्डों में करीब 81 नलकूपों से पानी की सप्लाई होती है। नगर पालिका के जलकल विभाग के द्वारा ऑटोमेशन से नलकूपों के संचालन के लिए टेंडर निकला गया। प्रथम बार निकाले गए टेंडर में पुरानी फर्म को लाभ नहीं मिल रहा था। यह देख जलकल विभाग ने विभिन्न कारण बताते हुए प्रथम बार निकाली गई निविदा को निरस्त करा दिया गया। इसके बाद फिर से रिटेंडर निकाला गया। सूत्रों का कहना है कि दूसरे बार निकाले गए टेंडर में चेयरपर्सन और ईओ से अनुमति लिए बना ही कुछ शर्तों को बदल दिया गया। वहीं पुराने फर्म को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से फर्म के द्वारा लाखों रुपए खर्च कराते हुए साफ्टवेयर को बदला गया। इस पर पांच फर्मो के द्वारा टेंडर में प्रतिभाग किया गया। लखनऊ की फर्म का टेंडर निकलने की भनक लगने पर जलकल विभाग के द्वारा टेंडर नहीं खोला गया। करीब डेढ माह तक टेंडर को नहीं खोला गया। बाद में डीएम और लखनऊ स्तर पर शिकायत होने पर टेंडर खोला गया, लेकिन टेंडर लखनऊ की सर्वेस फर्म के नाम निकला। जलकल विभाग के द्वारा वर्कऑर्डर में खेल कर दिया। नई फर्म को जुलाई माह से काम करने का वर्कऑर्डर दिया गया है। इस पूरे मामले में एई जलकल की भूमिका संदिग्ध बनी हुई है।

इन्होंने बताया
टेंडर में शर्तो को बदलने के लिए जलकल विभाग के द्वारा कोई अनुमति नहीं ली गई। वहीं साफ्टवेयर को बदलने के लिए भी कोई स्वीकृति नहीं मांगी गई है। दोनों मामलों में जलकल विभाग के अधिकारियों के द्वारा गुमराह किया गया है।
डा. प्रज्ञा सिंह, ईओ नगर पालिका

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