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नगर निगम बनने से पहले मुजफ्फरनगर नगर पालिका के परिसीमन पर उठे सवाल, हाईकोर्ट पहुंचा मामला

मुजफ्फरनगर। हिन्दुस्तान सिटी न्यूज

मुजफ्फरनगर नगर पालिका परिषद को नगर निगम बनाने का मामला हाईकोट पहुंच गया है। वार्ड संख्या 7 के सभासद मो. खालिद ने इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में पहुंचे है। सभासद मो. खालिद समेत करीब 18 सभासदों ने नगर पालिका के सीमा विस्तार के दौरान हुए परिसीमन पर आपत्ति जताई है। उन्होंने परिसीमन को नियमों के विपरित बताया है। इस मामले में सभासद मो. खालिद ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। उन्होंने बताया कि नगर निगम बनाने को लेकर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन सितम्बर 2022 में हुए सीमा विस्तार के परिसीमन में सुधार होना चाहिए। परिसीमन के दौरान 22 में से 11 गांव को नगर पालिका सीमा क्षेत्र में शामिल किया गया है, लेकिन शेष 11 गांव को छोड दिया गया है।
सभासद मो. खालिद ने बताया कि 13 अप्रैल 2026 में रोजगार मेले का उद्घाटन करने आए सीएम योगी आदित्यनाथ मुजफ्फनगर को नगर निगम बनाने के लिए प्रस्ताव भेजने की बात की थी। उन्होंने बताया कि विधानसभा के द्वितीय सत्र 2008 की प्रथम सोमवार को विधायक अब्दुल वारिस राव खां ने सीमा विस्तार हेतु प्रस्ताव रखा था। जिनमें 22 गांव सरवट, बझेडी, नसीरपुर, रामपुर, पचेडा कलां, मुस्तफाबाद, बिलासपुर, कूकडा, शेरनगर, अलमासपुर, बीबीपुर, संधावली, वहलना, मीरापुर, सुजडू, मंधेडा, शाहबुद्दीनपुर, मिमलाना, मुजफ्फरनगर, शेरपुर, बामनहेडी और पीनना को पालिका सीमा में शामिल करने के लिए प्रस्ताव रखा था। 13 अगस्त 2008 में संयुक्त सचिव शासन नगर विकास अनुभाग 2 के आदेशों के अनुपालन में 30 अगस्त 2008 में हुई बोर्ड बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव संख्या 257-2 सर्वसम्मति से पारित किया गया। इसके बाद इस संबंध में 5 जनवरी 2013 में हुई बोर्ड बैठक में प्रस्ताव संख्या 36 पारित किया गया। मुजफ्फरनगर की सीमा में सम्मिलित करने के लिए 22 गांव के अनापत्ति प्रमाण पत्र प्रधानों को जारी किए गए। 31 दिसम्बर 2020 में हुई बोर्ड बैठक में प्रस्ताव संख्या 399 विशेष इस बाबत पारित हुआ कि जो 22 गांवों में से 11 गांव का प्रस्ताव लाया जाए। उसमें एक कमेटी गठित हो तब जाकर दोबारा से प्रस्ताव सदन में लाया जाए। उन्होंने बताया कि पूर्व पालिकाध्यक्ष अंजू अग्रवाल का बोर्ड का कार्यकाल समाप्त होने पर प्रशासनिक स्तर पर 11 गांव का चयन कर प्रस्ताव शासन को भेजा गया। स्थानीय प्रशासन पर राजनैतिक दवाब के चलते वर्ष 2022 में अधिसूचना जारी हुई। परिसीमन के दौरान 11 गांव वहलना, मीरापुर, सुजडू, मंधेडा, खांजापुर, सहावली, सरवट, शाहबुद्दीनपुर, बीबीपुर, कूकडा, अलमासपुर को पालिका सीमा में शामिल कर 55 वार्ड बनाए गए। उन्होंने कहा कि परिसीमन नियमों के विपरित हुआ है। उन्होंने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करते हुए दोबारा से परिसीमन कराने की मांग की है।

प्रमुख सचिव नगर विकास से भी शिकायत
मुजफ्फरनगर। सभासद नौशाद खान, मो. खालिद, शिवम, प्रियांक कुमार, सुनिता, शौकत अंसारी, नौशाद, विजय कुमार, अब्दुल सत्तार, मो. शहजाद, सतीश कुमार, अन्नू कुरेशी, नर्गिस गुलरेज सिद्दीकी, शाहीन, मो. आदिल, नवाब जहां, अनीता, मरजुबाना ने प्रमुख सचिव नगर विकास से शिकायत की है कि मुजफ्फरनगर नगर निगम बनाने को लेकर कोई एतराज नहीं है, लेकिन इससे पहले परिसीमन सहीं नियमों के अनुसार होना चाहिए।

वर्तमान में 13 लाख के आस पास होगी जनसंख्या
मुजफ्फरनगर। सभासद मो. खालिद ने बताया कि वर्ष 2011 में शहर की जनसंख्या 3 लाख 92 हजार 768 थी। ढाई फीसदी प्रत्येक वर्ष बढोत्तरी जनसंख्या में हुई है। वर्ष 2023 से 55 वार्डों होने पर करीब 10 लाख 81 हजार 920 जनसंख्या हो गई है। जबकि 5 लाख की आबादी होने पर निगम बनाए जाने के आदेश है। वर्तमान में लगभग 13 लाख के आस पास जनसंख्या हो गई है।

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