मुजफ्फरनगर । हिन्दुस्तान सिटी न्यूज

जिला कृषि रक्षा अधिकारी राहुल तेवतिया ने बताया कि रबी में उगाई जाने वाली खाद्यान्न फसलों में गेहूँ, सरसो, गन्ना, चना,मटर एवं आलू की फसलों तापमान में गिरावट के साथ आर्द्रता वृद्धि होने के कारण रबी फसलों में लगने वाले सामयिक कीट/रोग के प्रकोप की सम्भावना बढ़ गयी है। जिसके दृष्टिगत बचाव एवं प्रबन्धन हेतु कृषकों को विभिन्न बिन्दुओं पर जानकारी व सुझाव दिए गए है।
उन्होंने बताया कि सरसो, राई बीज जनित रोगों के सुरक्षा हेतु 2.5 ग्राम थिरम 75 प्रतिशत, मेटाऐक्सिल 2.0 ग्राम प्रति किग्रा. बीज की दर से उपचारित सफेद गेरूई एवं तुलासिता रोग की प्रारंभिक अवस्था में रोकथाम की जा सकती है। पत्ती सुरंगक (लीफ माइनर) जैविक नियंत्रण कारक एजाडिरेक्टिन (नीम आपल) 0.15 प्रतिशत ई.सी. 2.5 लीटर प्रति हे. की दर से प्रयोग किया जा सकता है। कीट के रसायनिक नियंत्रण हेतु डाईिमथेएट 30 प्रतिशत ई.सी. अथवा लैम्ब्डासाईहलोथ्रिन 4.9 प्रतिशत सी.एस. 750 मि.ली. मात्रा को प्रति हे. की दर से 600-750 लीटर पानी में घोलकर छिडकाव करें। उन्होंने बताया कि अल्टरनेरिया पत्ती धब्बा इस रोग के नियंत्रण हेतु मैन्कोजब 75 प्रतिशत डब्लू०पी० अथवा जिलेब 75 प्रतिशत की 2.0 किग्रा० मात्रा प्रति हे. की दर से 600-750 लीटर पानी में घोलकर छिडकाव करना चाहिए। आरा मक्खी में डाईिमथाकएट 30 प्रतिशत 650 मिली०/ हे. अथवा क्यूनालफास 25 प्रतिशत ई०सी० की 1.2 ली० मात्रा/हे. की दर से 700 लीटर पानी में घोलकर छिडकाव करे। गेहू बीज जनित रोगों जैसे अनावृत कंडुआ एवं करनाल बंट के सुरक्षा हेतु 2.5 ग्राम थिरम 75 प्रतिशत, मेटाऐक्सिल 2.0 ग्राम प्रति किग्रा० बीज की दर से उपचारित कर बीज शोधन करना चाहिए। दीमक / गुजिया ब्युवेरिया बेसियाना 1.15 प्रतिशत की 2.5 किग्रा० प्रति हे0 की दर से 60-75 किग्रा० गोबर की खाद में मिलाकर हल्के पानी छींटा देकर 8-10 दिन छाया में रखने के पश्चात बुवाई से पूर्व आखिरी जुताई में समय खेत में मिला देने से दीमक सहित अन्य भूमि जनित कीटों का नियंत्रण हो जाता है। खडी फसल में दीमक / गुजिया के नियंत्रण हेतु क्लोरपाईरीफास 20 प्रतिशत ई०सी० 2.5 ली० मात्रा प्रति हे० की दर से सिंचाई के पानी के साथ प्रयोग करें।







