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पालिका के टैक्स विभाग से जारी फर्जी सर्टिफिकेट को लेकर टीएस को नोटिस, मांगा जवाब

मुजफ्फरनगर। हिन्दुस्तान सिटी न्यूज

नगर पालिका के टैक्स विभाग से जारी हुए फर्जी किरायेदारी सर्टिफिकेट प्रकरण में ईओ ने जांच शुरू कर दी है। ईओ ने इस मामले में प्रभारी टीएस को नोटिस भेजा है, वहीं इस संबंध में जवाब मांगा है। उधर पूर्व में फर्जी किरायेदारी सर्टिफिकेट बनाने से राजस्व निरीक्षक अमित कुमार के द्वारा साफ इंकार कर दिया गया था, लेकिन एक लिपिक और एक बीसी के द्वारा राजस्व निरीक्षक को बाईपास करते हुए उक्त फर्जी सर्टिफिकेट बनाया गया है। इस प्रकरण में लिपिक और बीसी की गर्दन फंसी हुई है। नगर पालिका में पूर्व से दोनों कई विभिन्न मामलों में काफी चर्चित रहे है। दोनो पर पूर्व में कोई कार्रवाई नहीं हो पायी है। जिस कारण दोनों के गलत कार्य करने के हौसले काफी बुलंद बने हुए है। बीसी को एक सभासद का पूर्ण सहयोग प्राप्त है, जिस कारण उस पर कोई कार्रवाई अभी तक नहीं हो पायी है। नगर पालिका के उक्त लिपिक और बीसी के कारनामों की काफी चर्चा हो रही है।
नगर पालिका के टैक्स विभाग में अचल संपत्ति 1073 मोहल्ला खालापार निवासी बैराईया पत्नी मो. हबीब और मेहराज बानो पत्नी मो. इनाम के नाम से दर्ज है। इस संपत्ति को लेकर नगर पालिका के टैक्स विभाग से बडा खेल कर दिया गया। फर्जी किरायेदारी का सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया। महराज बानो ने टैक्स विभाग में अपनी संपत्ति 1073 पर व्यवसायिक श्रेणी के हाउस और वॉटर टैक्स को घरेलू श्रेणी में करवाने का आवेदन किया था। महराज बानो ने बताया था कि स्कूल काफी समय से बंद चल रहा है। उधर टैक्स विभाग की ओर से एक व्यक्ति के नाम फर्जी तरह से किरायेदारी सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया। इस मामले में ईओ ने संज्ञान लेते हुए प्रभारी टीएस पारूल यादव को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। ईओ डा. प्रज्ञा सिंह ने बताया कि मामला काफी गंभीर है। इसकी जांच शुरू करा दी गई है। प्रभारी टीएस पारूल यादव को नोटिस भेजते हुए जवाब मांगा गया है। इस मामले में दोषी पर कडी कार्रवाई की जाएगी।

एक सभासद आरोपित बीसी को बचाने का कर रहे प्रसास
मुजफ्फरनगर। नगर पालिका में कार्यरत एक बीसी पूर्व से गलत कार्यों को लेकर काफी चर्चाओं में रहा है। इस बार भी इस बीसी के द्वारा फर्जी सर्टिफिकेट बनाने का मामला सापने आया है। इस बीसी के द्वारा पूर्व में टीएस नरेश शिवालिया के फर्जी साइन कर दिए गए थे। उस समय भी एक सभासद के द्वारा उक्त बीसी पैरवी करते हुए बचा लिया गया था। अब फिर से उक्त सभासद ने आरोपित बीसी को बचाने का प्रयास शुरू कर दिया है। कमाल की बात तो यह है कि उक्त बीसी नगर पालिका में फर्जी कार्य करने को लेकर काफी प्रसिद्ध है। उक्त बीसी के कारण नगर पालिका के अन्य कर्मचारियों की कार्य शैली पर सवाल उठ रहे है। चेयरपर्सन और ईओ को इस मामले में उक्त बीसी और लिपिक के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। ताकि भविष्य में कोई भी लिपिक और बीसी व अन्य कर्मचारी फर्जी कार्य व गलत कार्य नहीं कर पाए।

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