मुजफ्फरनगर। हिंदुस्तान सिटी न्यूज

नगर पालिका परिषद के वार्ड-54 के सभासद मोहम्मद शहजाद ने नगर पालिका क्षेत्र में नाली और सड़क निर्माण कार्यों में कथित अनियमितता, सरकारी धन के दुरुपयोग और कार्ययोजना के विपरीत निर्माण कराए जाने का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी से शिकायत की है। सभासद ने मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने निर्माण विभाग के सहायक अभियंता, अवर अभियंता, एक सभासद व ठेकेदार पर गम्भीर आरोप लगाए है।

जिलाधिकारी को दिए पत्र में सभासद ने आरोप लगाया कि योजना के अनुसार वार्ड सं0-25 एवं 45 स्थित तबलशाह रोड पर कादिर राणा की कोठी से इफ्तेखार सीमेंट एजेन्सी तक, मकान तक आर०सी०सी० नाली एवं सी०सी० सडक निर्माण कार्य हेतु लगभग 79 लाख निधि से स्वीकृत हुआ। परन्तु सहायक अभियन्ता (निर्माण) व अवर अभियंता (निर्माण) ने ठेकेदार व एक सभासद के साथ मिलकर भारी मिली भगत की है। नाली का निर्माण कार्य पूरी तरह से अधूरा छोड दिया गया है। उपरोक्त निर्माण कार्य में लगभग 10 लाख निधि को शामिल कर एक टेन्डर ऑफ लाईन कराया गया है। इसके बावजूद भी अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर उपरोक्त ठेकेदार को पूर्ण भुगतान भी करा दिया है। इस प्रकार के भ्रष्टाचार और लापरवाही से शासकीय राजस्व को भारी नुकसान हुआ है। आरोप है कि संबंधित निर्माण कार्य में नियमों की अनदेखी की गई और स्वीकृत योजना के अनुरूप कार्य नहीं कराया गया। सभासद ने सहायक अभियंता, अवर अभियंता तथा संबंधित ठेकेदार की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। शिकायत में वार्ड-25 के दक्षिणी कुआं क्षेत्र में सोनू से कल्लू तक तथा विनोद से राजू के मकान तक आरसीसी नाली निर्माण के लिए स्वीकृत करीब दस लाख रुपये की धनराशि का भी उल्लेख किया गया है। सभासद का आरोप है कि इस कार्य में भी मानकों और निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया तथा संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत से सरकारी धन के भुगतान में अनियमितता की गई।सभासद ने जिलाधिकारी से मांग की है कि दोनों निर्माण कार्यों की मौके पर जांच कराई जाए। स्वीकृत कार्ययोजना, टेंडर प्रक्रिया, निर्माण की गुणवत्ता, माप पुस्तिका और किए गए भुगतान की भी जांच हो। उन्होंने कहा कि जांच में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदार के विरुद्ध कठोर कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए। शिकायत के बाद नगर पालिका में निर्माण कार्यों की पारदर्शिता और सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।






