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चेयरपर्सन ने 8 कालोनियों को शत्रु संपत्ति घोषित करने के मामले में सीएम योगी से की शिकायत, योगी ने डीएम से मांगी रिपोर्ट

मुजफ्फरनगर। हिन्दुस्तान सिटी न्यूज

मुजफ्फरनगर नगर पालिका चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप ने शहर की आठ कालोनियों को शत्रु संपत्ति घोषित करने को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत की है। उन्होंने अपनी शिकायत में कई बिन्दुओं पर प्रकाश डाला है। सीएम योगी ने ज्ञापन लेने के बाद डीएम उमेश मिश्रा से इस प्रकरण में तत्काल प्रभाव से रिपोर्ट मांगी है। सीएम ने चेयरपर्सन को इस प्रकरण में विस्तार से वार्ता करने के लिए लखनऊ आने के लिए आमंत्रित किया है।

चेयरपर्सन ने सीएम को ज्ञापन देते हुए बताया कि मुजफ्फरनगर शहर की लगभग 570 बीघा बहुमूल्य भूमि, जिस पर वर्तमान में नई मंडी, गांधी कॉलोनी, द्वारिकापुरी, पटेलनगर, आदर्श कॉलोनी, साकेत, लाला दीपचंद कॉलोनी एवं शिवपुरी जैसी प्रमुख शत प्रतिशत हिंदू आवासीय कॉलोनियाँ विकसित हैं, को वर्ष 2019 में एक बलहीन शिकायत के आधार पर नियमों के विपरीत शत्रु संपत्ति घोषित कर दिया गया। इसके परिणामस्वरूप पिछले लगभग 7 वर्षों से इस क्षेत्र में संपत्तियों के क्रय-विक्रय एवम बैंक लोन पर पूर्ण प्रतिबंध लागू है, इस शिकायत का आज तक भी कोई उचित निस्तारण नहीं किया गया। जिससे प्रतिबंधित घोषित क्षेत्र में निवास कर रहे लगभग 20,000 से अधिक परिवार गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि  वर्ष 1942 में तत्कालीन नवाब शमशेर जंग सज्जाद अली ने इस भूमि के संबंध में तत्कालीन एमएलसी लाला दीपचंद के पक्ष में एक एग्रीमेंट किया था। बाद में आपसी विवाद के चलते नवाब द्वारा उक्त एग्रीमेंट को तोड़कर यह भूमि लाला दुर्गा प्रसाद को विक्रय कर दी गई, जिससे एक लंबा कानूनी विवाद प्रारंभ हुआ। लाला दीपचंद एग्रीमेंट तोड़ने पर न्यायालय चले गये और वर्ष 1949 में न्यायालय द्वारा लाला दुर्गा प्रसाद के पक्ष में की गई सेल डीड को निरस्त कर दिया गया। वर्ष 1950 में न्यायालय के माध्यम से नवाब की उक्त भूमि पर मालिकाना हक के लिए लाला दीपचंद को विधिवत बैनामा प्राप्त हुआ और उन्हें भूमि का स्वामित्व प्रदान किया गया। इसके पश्चात इस क्षेत्र में वैधानिक रूप से कॉलोनियों का विकास हुआ तथा शिक्षण संस्थान ,अस्पताल , व्यावसायिक बाज़ार ,स्थापित किए गए। राज्य सरकार द्वारा भी समय-समय पर इसी भूमि का लाला दीपचंद और उनके वारिसों से अधिग्रहण कर विभिन्न सार्वजनिक कार्य संपन्न किए गए, जिससे यह सिद्ध होता है कि भूमि को वैध रूप से स्वीकृति प्राप्त थी और यह किसी भी स्तर पर शत्रु सम्पत्ति घोषित नहीं थी। वर्ष 2017 में प्रशासन द्वारा इस भूमि को शत्रु संपत्ति प्रतीत होने का नोटिस जारी किया गया, परंतु उस समय कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और न ही इसके लिए कोई विस्तार से नियमों के अनुसार जांच प्रारम्भ कराई गई। वर्ष 2019 में एक आधारहीन शिकायत के आधार पर भारत सरकार के शत्रु संपत्ति विभाग द्वारा जांच प्रारंभ की गई और फिर विभागीय स्तर पर इसकी रिपोर्ट गृह मंत्रालय भारत सरकार को भेजी गई, जिसके आधार पर गृह मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा और सरकार के पत्र पर जिला प्रशासन मुजफ्फरनगर ने कोई भी उचित या कानूनी सलाह लिये बगैर कार्रवाई शुरू कर दी। इसी जांच को आधार बनाकर जिला प्रशासन मुजफ्फरनगर द्वारा उक्त 8 कॉलोनियों में संपत्ति के क्रय-विक्रय पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया। यह प्रतिबंध सात साल का लंबा समय बीतने के बावजूद आज तक जारी है, जिससे स्थानीय नागरिकों को भारी आर्थिक, सामाजिक एवं मानसिक कष्ट झेलना पड़ रहा है। इस प्रतिबंध के कारण पटेलनगर, द्वारिकापुरी, आदर्श कॉलोनी, साकेत, नई मंडी, गांधी कॉलोनी, लाला दीपचंद कॉलोनी एवं शिवपुरी आवासीय कालोनी के साथ ही इसी क्षेत्र में एसडी कॉलेज, ब्राह्मण कॉलेज तथा पुलिस लाइन जैसे महत्वपूर्ण संस्थान भी स्थित हैं। ये सभी इस आदेश और प्रतिबंध से प्रभावित हैं। इस भूमि के संबंध में वर्षों पूर्व वैध बैनामों के आधार पर लोगों ने संपत्तियां खरीदी हैं। अनेक नागरिकों के पास उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की प्रतियां सुरक्षित हैं, जो उनके स्वामित्व को प्रमाणित करती हैं। इसमें कुछ उद्यमी भी शामिल है, उनका दावा है कि उन्होंने लाला दीपचंद और उनके वारिसों से लगभग 35-40 वर्ष पूर्व विधिवत 25 हजार वर्ग गज भूमि क्रय की थी। उसके लिए उनके पास कानूनी, न्यायालय से साबित और राजस्व विभाग के प्रमाणित दस्तावेज उपलब्ध हैं। इसमें शत्रु संपत्ति घोषित किए जाने का आधार मात्र एक शिकायत है, जो तथ्यात्मक एवं विधिक रूप से संदिग्ध प्रतीत होती है। संपत्ति का क्रय-विक्रय पूर्णत: बंद होने से लोग अपनी संपत्ति का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। आर्थिक संकट, विवाह, शिक्षा एवं चिकित्सा के साथ ही आकस्मिक बीमारी जैसी आवश्यकताओं के लिए संपत्ति बेचने में असमर्थता। बैंक लोन, नक्शा पास कराने, निर्माण कार्य आदि सभी कार्य प्रभावित। वर्षों से बसे परिवारों में असुरक्षा एवं अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। उपर्युक्त तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट है कि—पूरे विकसित शहरी क्षेत्र को नियमों के विपरीत शत्रु संपत्ति घोषित किया गया है, तथा बिना अंतिम निष्कर्ष के इतने लंबे समय तक प्रतिबंध बनाए रखना न्यायोचित नहीं है। चेयरपर्सन ने इस प्रकरण की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। जब तक कोई अंतिम विधिक निर्णय न हो, तब तक संपत्ति के क्रय-विक्रय पर लगे प्रतिबंध को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए। निर्दोष एवं वैध स्वामित्व वाले नागरिकों को इस अनावश्यक परेशानी से राहत दिलाई जाए। यह विषय सीधे तौर पर हजारों परिवारों के जीवन एवं भविष्य से जुड़ा हुआ है। चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप ने बताया कि सीएम ने इस मामले में डीएम से रिपोर्ट मांगी है। वहीं साक्ष्य सहित हमें वार्ता के लिए लखनऊ में बुलाया है।

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