कानपुर। हिंदुस्तान सिटी न्यूज
उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने चिकित्सा जगत और मानवता, दोनों को शर्मसार कर दिया है। शहर के बीचों-बीच चल रहा था अंगों की तस्करी का एक ऐसा खेल, जिसकी कमान आठवीं पास एक जालसाज और नामी अस्पतालों के डॉक्टरों के हाथ में थी। पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए इस पूरे रैकेट की परतों को उधेड़ कर रख दिया है।
जांच की शुरुआत और ‘आरोही’ का कनेक्शन

पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल के मुताबिक, इस रैकेट का इनपुट पुलिस को पिछले साल ही मिल गया था। पुलिस लगातार इस गैंग को ट्रेस करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन अपराधी इतने शातिर थे कि ‘पिन-पॉइंट’ लोकेशन यानी उस मुख्य अस्पताल तक पहुँचना मुश्किल हो रहा था जहाँ ये काला धंधा फल-फूल रहा था। मामले में पहली बड़ी सफलता तब मिली जब सीएमओ और डीसीपी की जांच के बाद ‘आरोही हॉस्पिटल’ को सीज किया गया। यहीं से कड़ियां जुड़नी शुरू हुईं और जांच की आंच पहुँची ‘आहूजा हॉस्पिटल’ तक।
आठवीं पास ‘डॉक्टर’ और गैंग का मास्टरमाइंड

इस पूरे खेल का सबसे चौंकाने वाला किरदार है शिवम अग्रवाल उर्फ काना। जो कहने को तो सिर्फ आठवीं पास है और एम्बुलेंस चलाता है, लेकिन गले में आला (Stethoscope) डालकर वह बड़े-बड़े मरीजों को अपने जाल में फंसाता था। शिवम की गिरफ्तारी के बाद जब कड़ियां जुड़ीं, तो पुलिस के भी होश उड़ गए।
टेलीग्राम ग्रुप और डॉक्टर अफजाल का जाल
यह रैकेट हाईटेक तरीके से संचालित हो रहा था। मेरठ का डॉक्टर अफजाल इस पूरे नेटवर्क का डिजिटल सारथी था। उसने टेलीग्राम पर एक ग्रुप बना रखा था, जहाँ किडनी डोनर और रिसीवर का सौदा होता था।
रिसीवर: पारुल तोमर, मेरठ की निवासी जिसकी दोनों किडनियां खराब हैं।
डोनर: आयुष, जो बिहार के समस्तीपुर का रहने वाला है और विडंबना देखिए कि वह MBA
फाइनल ईयर का छात्र है।
डॉक्टर अफजाल इसी ग्रुप के जरिए पैसों की डील फिक्स करता था।
*ऑपरेशन का खौफनाक तरीका*
कानपुर में अब तक ऐसे 40 से 50 अवैध ऑपरेशन किए जा चुके हैं। साउथ अफ्रीकन महिला का भी किडनी ट्रांसप्लांट हो चुका है ।अकेले आहूजा हॉस्पिटल में 7 से 8 सर्जरी हुई हैं। इनके काम करने का तरीका किसी थ्रिलर फिल्म जैसा था:
जिस दिन ऑपरेशन होना होता, आहूजा हॉस्पिटल के पूरे स्टाफ की छुट्टी कर दी जाती। डॉ. रोहित अपनी विशेष टीम के साथ आते और सर्जरी को अंजाम देते। ऑपरेशन के तुरंत बाद डोनर और रिसीवर को वहां से हटाकर अलग-अलग अस्पतालों में शिफ्ट कर दिया जाता। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि किसी भी अस्पताल में इन मरीजों की कोई मेडिकल हिस्ट्री या रिकॉर्ड नहीं रखा जाता था।
गिरफ्तार आरोपियों की सूची
पुलिस ने अब तक इस मामले में भारी कार्रवाई करते हुए निम्नलिखित लोगों को सलाखों के पीछे भेजा है:
डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा और
शिवम अग्रवाल उर्फ काना (फर्जी डॉक्टर/एम्बुलेंस चालक)
नरेंद्र सिंह (प्रिय हॉस्पिटल का मालिक)
राम प्रकाश कुशवाहा (मेड लाइफ हॉस्पिटल)
राजेश कुमार (आरोही हॉस्पिटल का पूर्व संचालक)
कानपुर पुलिस की इस कार्रवाई ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कैसे एक आठवीं पास शख्स डॉक्टर बनकर शहर के बड़े अस्पतालों में सर्जरी सेट करा रहा था? फिलहाल, पुलिस डॉ. रोहित और डॉ. अफजाल की तलाश में छापेमारी कर रही है। उम्मीद है कि जल्द ही इस गैंग के बाकी सफेदपोश चेहरे भी बेनकाब होंगे।






