मुजफ्फरनगर। हिन्दुस्तान सिटी न्यूज

एडीएम गजेंद्र कुमार ने सभी प्रबंधक / प्रधानाचार्य
प्राथमिक/हाई स्कूल/इंटर कॉलेज शासकीय/अशासकीय सहायता प्राप्त / मान्यता प्राप्त विद्यालय, यह सर्वविदित है कि शिक्षा समाज के विकास की आधारशिला है तथा प्रत्येक बच्चे को शिक्षा प्राप्त करना उसका मूल अधिकार है। भारत के संविधान में भी अभिभावकों का यह कर्तव्य निर्धारित किया गया है कि वे अपने 06 से 14 वर्ष तक के बच्चों को अनिवार्य रूप से शिक्षा दिलाएं। इसके अतिरिक्त समाज एवं शैक्षिक संस्थानों का भी यह नैतिक दायित्व है कि वे विद्यार्थियों को शिक्षा प्राप्त करने हेतु यथासंभव प्रोत्साहन, सहयोग एवं अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराएं। वर्तमान समय में विभिन्न शिक्षा बोर्डों द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार यह देखा जा रहा है कि विद्यार्थियों के अगली कक्षा में प्रवेश लेने पर अधिकांशतः पाठ्यपुस्तकें परिवर्तित हो जाती हैं, जिसके कारण पूर्व कक्षाओं की अनेक पुस्तकें अनुपयोगी रह जाती हैं। परिणामस्वरूप इन पुस्तकों का पुनः उपयोग नहीं हो पाता और कई बार आर्थिक रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद विद्यार्थियों को नई पुस्तकें क्रय करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इस स्थिति के कारण कुछ बच्चे शिक्षा से वंचित भी रह जाते हैं, जो कि समाज के लिए चिंताजनक विषय है। विद्यार्थियों के हित एवं शिक्षा के प्रसार को ध्यान में रखते हुए यह अपेक्षा की जाती है कि जनपद के समस्त विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थी जब अगली कक्षा में प्रवेश लें, तो उनके पास उपलब्ध पूर्व कक्षा की उपयोगी पाठ्यपुस्तकों को स्वेच्छा से एकत्रित कर सुरक्षित रखने की व्यवस्था की जाए। इसके लिए जनपद स्तर पर महावीर चौक स्थित जिला पुस्तकालय / निर्धारित पुस्तक संग्रह केन्द्र में इन पुस्तकों को जमा कराया जाना प्रस्तावित है।
इस संबंध में निम्न व्यवस्था सुनिश्चित की जाए-
प्रत्येक विद्यालय अपने यहाँ से प्राप्त पुरानी पाठ्यपुस्तकों को संकलित कर महावीर चौक स्थित पुस्तक संग्रह केन्द्र / पुस्तकालय में उपलब्ध कराए। पुस्तकों के प्राप्त होने पर उनकी विधिवत प्रविष्टि एक पृथक रजिस्टर में की जाए, जिससे पुस्तकों का विवरण सुरक्षित रूप से अभिलेखित रहे। इस कार्य के सुचारु संचालन हेतु संबंधित डी०आई०ओ०एस० को प्रभारी नामित किया जाता है। डी०आई०ओ०एस० (इंचार्ज) द्वारा रजिस्टर संधारित कराने की व्यवस्था की जाए।
संकलित पुस्तकों को जरूरतमंद विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को निःशुल्क उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे इनका उपयोग कर अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।
इस व्यवस्था का विद्यालय स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार कराया जाए, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थी एवं अभिभावक इस सुविधा का लाभ उठा सकें।
समाज के शिक्षा के प्रति जागरूक नागरिक एवं पूर्व में पास आउट विधार्थियों से भी सक्रिय रूप से प्रतिभाग हेतु अपेक्षा की जाती है।
साथ ही, इस संबंध में समस्त नगर निकायों के अधिशासी अधिकारियों को भी सूचित किया जा रहा है, ताकि नगर स्तर पर भी इस अभियान की जानकारी आमजन तक पहुंचाई जा सके।
उन्होंने कहा कि उक्त व्यवस्था के सफल क्रियान्वयन हेतु आप सभी से अपेक्षा की जाती है कि इस कार्य को सामाजिक दायित्व एवं जनहित के दृष्टिगत प्राथमिकता के आधार पर क्रियान्वित करते हुए जरूरतमंद विद्यार्थियों को अधिकतम लाभान्वित करने का प्रयास करेंगे।







