मुजफ्फरनगर। हिन्दुस्तान सिटी न्यूज

ग्राम पंचायतों से होने वाले भुगतान में पारदर्शिता लाने के लिए नियमों में कुछ बदलाव किए गए है। अब बिना जीएसटी के ग्राम पंचायतों से कोई भी भुगतान नहीं हो पाएगा। ग्राम पंचायतों के पोर्टल पर आपूर्तिकर्ताओं, फर्मों के जीएसटी नंबर फीड करना जरूरी है, जिसके बिना बिल स्वीकृत नहीं होंगे। भुगतान प्रणाली में बदलाव के बाद अब भुगतान के लिए केवल पीएफएमएस ही नहीं, बल्कि जीएसटी के बिल और वैध दस्तावेज अनिवार्य होंगे।
ग्राम पंचायतों में अब सभी तरह के भुगतान पर जीएसटी (गुड्स सर्विस टैक्स) को अनिवार्य कर दिया गया है। ताकि फर्जी फर्मों के नाम से होने वाले भुगतान को प्रभावी स्तर पर रोका जा सके। जनपद में 487 ग्राम पंचायतें है। जिसमें से 357 ग्राम पंचायतों की जीएसटी बन गई है। शेष 130 ग्राम पंचायत अभी प्रक्रिया में है। पंचायतीराज विभाग ने भुगतान में मनमानी और ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर मनमाने बिल-वाउचर फीड किए जाने के खुलासे के बाद ग्राम पंचायतों को जीएसटीएन आवंटित कराए जाने का निर्णय लिया गया है। ग्राम पंचायतों में जीएसटीएन आवंटन के लिए पंचायतीराज विभाग ने पंचायत सचिवों को जिम्मेदारी सौंपी है। बिना जीएसटी नंबर के भुगतान न करने के आदेश दिए गए हैं। फर्म को भुगतान करने पर जीएसटी कटौती होते ही जीएसटी विभाग को संबंधित फर्म की जानकारी हो जाएगी और कटौती की गई जीएसटी का भुगतान फिर बैंक में चालान के माध्यम से किया जाएगा।

इन्होंने बताया
शासन स्तर से भुगतान प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। अब बिना जीएसटी के ग्राम पंचायतों से भुगतान नहीं हो पाएगा। जनपद में करीब 357 ग्राम पंचायतों की जीएसटी बन गई है। शेष 130 ग्राम पंचायत की प्रक्रिया चल रही है। इनकी शीघ्र जीएसटी बन जाएगी।
रेनू श्रीवास्तव, डीपीआरओ






