मुजफ्फरनगर। हिन्दुस्तान सिटी न्यूज

जनपद में मनरेगा की मजदूरी कम होने के कारण लगातार मजदूरों की संख्या घटती जा रही है। मनरेगा में काम करने के लिए अफसरों को मजदूर नहीं मिल रहे है। जिस कारण मनरेगा के तहत होने वाले विभिन्न कार्य प्रभावित बने हुए है। जनपद में मनरेगा के तहत काम करने पर 252 रुपए मजदूरी मिलती है। जबकि पानीपत में मनरेगा की 400 रुपए मजदूरी है। इसी कारण मानव दिवस कम होते जा रहे है।
जनपद में मनरेगा के तहत वर्ष 2024-25 में करीब 10 लाख मानव दिवस हुए थे, लेकिन वर्ष 2025-26 में करीब 6 लाख हुए मानव दिवस हुए है। इसका कारण मनरेगा के तहत मिलने वाली कम मजदूरी है। पूर्व में दस हाजर से अधिक जॉब कार्ड धारक मजदूर मनरेगा में काम कर रहे थे, लेकिन अब मनरेगा में करीब 3557 मजदूर कार्य कर रहे है। इन मजदूरों के द्वारा करीब 299 ग्राम पंचायतों में पौधा रोपण, खेत की चकरोड, तालाब से संबंधित आदि कार्य किए जा रहे है। औद्योगिक क्षेत्र में करीब 500 से 600 रुपए मजदूरी है। इसलिए अधिकांश मजदूर अपने परिवार को अच्छा पालन पोषण के लिए फैक्ट्रियों में काम कर रहे है। उधर ग्राम प्रधान भी रजिस्टर्ड ठेकेदारों से ग्राम पंचायतों में काम करा रहे है।

कम मजदूरी होने के कारण मनरेगा में काम करने के लिए जॉब कार्ड धारक मजदूरों की संख्या घटती जा रही है। वर्ष 2024-25 में करीब 10 लाख मानव दिवस हुए, लेकिन वर्ष 2025-26 में करीब 6 लाख हुए मानव दिवस हुए है। जनपद में मनरेगा के तहत काम करने पर 252 रुपए मजदूरी है, वहीं पानीपत में 400 रुपए मनरेगा की मजदूरी है।
प्रमोद यादव, डीसी मनरेगा






