मुजफ्फरनगर। हिन्दुस्तान सिटी न्यूज

नगर पालिका ने स्मार्ट सिटी बनाने के लिए पहल कर दी है। शहर की निगरानी रखने के लिए नगर पालिका स्मार्ट कंट्रोल रूम बनाएगी। यह स्मार्ट कंट्रोल रूम लखनऊ की तर्ज पर बनाया जाएगा। शहर के सभी 55 वार्ड और मुख्य मार्गों पर सीसीटीवी कैमरे लगाते हुए उन्हें स्मार्ट कंट्रोल रूम से जोडा जाएगा। इसके लिए शासन स्तर पर बजट की डिमांड की गई है। यदि शासन स्तर से बजट नहीं मिला तो बोर्ड फंड से इस कार्य को कराया जाएगा।
नौ जुलाई को स्थानीय निकाय निदेशालय अपर निदेशक डॉ. असलम अंसारी ने नोडल अफसर के रूप में नगर पालिका पहुंच कर अधिकारियों के साथ बैठक की थी। बैठक में नगर पालिका को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की योजना पर चर्चा की गई और जानकारी जुटाई गई। इसके लिए निर्धारित 24 बिन्दुओं पर समीक्षा की थी। ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह ने बताया कि चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप के मार्गदर्शन में हम शहर को सुरक्षा, व्यवस्था और स्वच्छता के साथ ही यहां पर पर्यावरण संरक्षण के लिए हरित संकल्प के साथ काम कर रहे हैं। पालिका को स्मार्ट सिटी योजना में चयनित किया है और इसके लिए यहां पर होने वाले कुछ मुख्य कार्यों के लिए प्रस्ताव भी मांगे गये हैं। उन्होंने बताया कि स्मार्ट लाइब्रेरी, ऑडिटोरियम, गौशाला, स्मार्ट रिकॉर्ड रूम, स्मार्ट पार्क और स्मार्ट रोड के लिए काम किया जाना है। उन्होंने बताया कि शहर में स्मार्ट कंट्रोल रूम लखनऊ की तर्ज पर बनाया जाएगा। वर्तमान में नगर पालिका के 78 सीसीटीवी कैमरे लगे हुए है। शहर के सभी 55 वार्डो में सीसीटीवी कैमरे लगाकर कंट्रोल रूम से जोडा जाएगा। यहां पर स्मार्ट कंट्रोल रूम को संचालित करने के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी।
बनाई जा रही है। 55 वार्डों को कुछ जोन में विभाजित करते हुए सभी क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का प्रस्ताव है, इसके लिए पालिका मुख्यालय पर अपना एक कमांड कंट्रोल सेंटर स्थापित किया जायेगा। सभी कैमरों को इससे जोड़कर शहरवासियों को 24 घंटे डिजीटल सिक्योरिट की निगरानी प्रदान की जायेगी। इसके साथ ही स्वच्छता में लगाये जाने वाले सभी कूड़ा वाहनों को भी तकनीकी निगरानी के दायरे में लाकर इस कंट्रोल सेंटर से जोड़ा जायेगा ताकि सफाई व्यवस्था की सतत निगरानी की जा सके।
ईओ ने बताया कि इसके लिए पालिकाध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप की सहमति पर कार्य प्रारम्भ कि गया है। कार्ययोजना बनाकर जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भेजी जायेगी। शासन से इसके लिए बजट स्वीकृत कराने का प्रयास किया जायेगा, बजट नहीं भी मिला तो पालिकाध्यक्ष ने इस कार्य को बोर्ड फण्ड से कराने के लिए अपनी स्वीकृति प्रदान की है।







