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नियम विरूद्ध काम करने पर कंपनी , थोक व खुदरा विक्रेता पर सीधे होगी एफआईआर

मुजफ्फरनगर। हिंदुस्तान सिटी न्यूज

जिलाधिकारी उमेश मिश्रा की अध्यक्षता में आज जनपद की उर्वरक समिति एवं धरती माता बचाओ निगरानी समिति की बैठक विकास भवन के सभागार कक्ष में जनपद में आयोजित हुई।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी  कंडारकर कमलकिशोर देशभूषण, जिला कृषि अधिकारी/सहकारिता गन्ना,व उधान अधिकारी के साथ साथ प्रतिनिधि, मै0 यारा फर्टीलाइर्स लि0, चंबल फर्टिलाइजर , इफ़को, कृभको , ओस्टवाल उर्वरक सहायक एवं थोक एवं उर्वरक प्रदानकर्ता व सुगर मिल बन्धुओं द्वारा प्रतिभाग किया गया।
राहुल तेवतिया जिला कृषि अधिकारी द्वारा वर्तमान समय में किसानों द्वारा रासायनिक उर्वरकों के बढते प्रयोग को कम करने तथा उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग के बारे में जागरूकता को बढाये जाने पर बल देते हुये विस्तारपूर्वक बताया गया। विक्रेताओं को बताया गया कि किसानों को सही समय व सही विधि के अनुसार आवश्यक पोषक तत्वों की सही मात्रा में रासायनिक उर्वरक प्रयोग में लाने के लिये समझाया जाये। बताया गया कि प्रत्येक सप्ताह में एक दिन निर्धारित कर दुकान से जुडे कृषकों को एकत्र कर जागरूकता गोष्ठी आयोजित की जाये। इसमें वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने तथा रासायनिक उर्वरकों के अन्धाधुन्ध प्रयोग को कम करने, इनके दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी करायें। इनके स्थान पर वैकल्पिक उपायों जैसे जैविक खाद में गोबर की खाद, कम्पोस्ट खाद, वर्मी कम्पोस्ट, हरी खाद में ढैंचा, सनई, लोबिया जैसी फसलों को जोतकर मिट्टी में मिलाना तथा जैब उर्वरक(बायो-फर्टीलाइजर्स) राइजोबियम, एजोटोवेक्टर, फॉस्फेट साल्युबिलाइजिंग बैक्टीरिया (पी0एस0बी0) में प्रयोग के बारे में अवगत कराया गया।
बैठक में अवगत कराया गया कि किसानों को फसल चक्र अपनाने के लिये प्रेरित किया जाये। इसमें दलहनी फसलों को फसल चक्र में शामिल करना एवं एक ही खेत में विभिन्न फसलें उगाने को कहा गया। अवगत कराया गया कि किसानों को फसल अवशेष को जलाना नहीं चाहिये, अपितु इसको मिट्टी में मिलाकर कम्पोस्ट खाद के रूप में प्रयोग किया जाना चाहिये। यदि किसान सन्तुलित उर्वरकों का प्रयोग करेगा तो इससे वह अधिक एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त कर सकेगा, जिसका बाजार विक्रय मूल्य अच्छा प्राप्त होगा। इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है। पर्यावरण संरक्षित रहता है। इससे लागत में कमी व लाभ में वृद्धि होगी। विक्रेताओं को बताया गया कि शासन के निर्देशानुसार कृषक को उनकी जोत वही एवं फसल में संस्तुत मात्रा के अनुसार ही उर्वरक विक्रय की जाये। इसका सम्पूर्ण विवरण विक्रय पंजिका में अंकित किया जाये। आगामी सत्र से किसानों को फार्मर रजिस्ट्री के आधार पर उसमें अंकित कृषित भूमि के आधार पर उर्वरक प्राप्त हो सकेगी।
यह आवश्यक है कि किसान की फार्मर रजिस्ट्री पूर्व में की गयी है। यदि फार्मर रजिस्ट्री नहीं है, तब विक्रेता को किसान की फार्मर रजिस्ट्री बनाने हेतु प्रशिक्षण दिया गया। विकेताओं को फार्मर सहायक यूपी एप्प डाउनलोड कराकर फार्मर रजिस्ट्री करने का तरीका समझाया गया, जिससे कि वह दुकान पर आने पर किसानों की फार्मर रजिस्ट्री कर सके।
ज़िलाधिकारी द्वारा बताया गया की नियमों का पालन करते हुए काम करे कोई भी परेशानी हो तो मुझसे सीधे संपर्क कर सकते है, फिर भी अगर उर्वरक वितरण को लेकर या टॉप 20 में कोई भी विक्रेता आता है या टैगिंग करता है तो कंपनी , थोक व खुदरा विक्रेता के विरुद्ध कार्यवाही की जाये और सीधे एफआईआर दर्ज कराए जाने हेतु निर्देश दिए गए।

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