बहराइच। हिंन्दुस्तान सिटी न्यूज

प्रशासनिक सेवा में संवेदनशीलता, निष्पक्षता और जनहित को सर्वोपरि रखते हुए अपनी अलग पहचान बनाने वाली एसडीएम मोनालिसा आज महिला नेतृत्व की एक सशक्त और प्रेरणादायी मिसाल बन चुकी हैं। अपनी सक्रिय कार्यशैली, सख्त प्रशासनिक फैसलों और जनसंवाद के माध्यम से उन्होंने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत किया है, बल्कि आम जनता के बीच भी एक भरोसेमंद और जनप्रिय अधिकारी की छवि स्थापित की है।

मूल रूप से बरेली की निवासी मोनालिसा ने वर्ष 2011 में सिविल सेवा में चयनित होकर प्रशासनिक सेवा में कदम रखा। कठिन परिश्रम, संघर्ष और दृढ़ संकल्प के बल पर हासिल की गई यह उपलब्धि उनके व्यक्तित्व की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। सेवा में आने के बाद उन्होंने हर जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निभाते हुए प्रशासनिक कार्यशैली की एक अलग मिसाल कायम की।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रशासन केवल आदेशों और नियमों का ढांचा नहीं होता, बल्कि यह जनता और शासन के बीच विश्वास की वह मजबूत कड़ी होता है जो व्यवस्था की स्थिरता तय करता है। एसडीएम मोनालिसा की कार्यशैली इसी सोच को दर्शाती है। वे अपने पद को अधिकार नहीं बल्कि जिम्मेदारी के रूप में देखती हैं और जनहित को सर्वोपरि रखते हुए निर्णय लेती हैं।
उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता जनता से सीधा संवाद और समस्याओं के त्वरित समाधान की प्रतिबद्धता है। वे आमजन की समस्याओं को गंभीरता से सुनती हैं और उनके समाधान के लिए तत्काल कार्रवाई करती हैं। यही वजह है कि क्षेत्र की जनता के बीच उनकी पहचान एक सुलभ, संवेदनशील और भरोसेमंद अधिकारी के रूप में बनी है।
जहां-जहां उनकी तैनाती रही, वहां उन्होंने अपने दृढ़ प्रशासनिक निर्णयों और ताबड़तोड़ कार्रवाई से अवैध गतिविधियों और अतिक्रमण पर प्रभावी अंकुश लगाया। सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई हो या प्रशासनिक व्यवस्थाओं को दुरुस्त करना — हर मोर्चे पर उन्होंने अपने मजबूत नेतृत्व का परिचय दिया।
उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे प्रशासनिक जिम्मेदारियों को केवल कागजी औपचारिकताओं तक सीमित नहीं रखतीं, बल्कि मैदान में उतरकर व्यवस्था को मजबूत बनाने में विश्वास करती हैं। यही कारण है कि जहां भी उन्होंने कार्य किया, वहां उनकी अलग और प्रभावशाली प्रशासनिक पहचान बनी। आज भी उनको उन जनपदों में याद किया जाता है जहां वह तैनात रह चुकी हैं।
महिला सशक्तिकरण के विषय में अपने विचार व्यक्त करते हुए एसडीएम मोनालिसा का कहना है कि आज की महिलाएँ हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और क्षमता का परिचय दे रही हैं। यदि उन्हें उचित अवसर और सही मार्गदर्शन मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल कर सकती हैं।
दरअसल किसी भी प्रशासनिक पद की असली गरिमा उसके अधिकारों में नहीं, बल्कि उस सेवा भावना और जनहित के प्रति समर्पण में होती है जिसके साथ उसे निभाया जाता है। एसडीएम मोनालिसा की कार्यशैली इसी भावना का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करती है।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उनका यह सफर न केवल महिला सशक्तिकरण की प्रेरक कहानी है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि जब महिलाएँ नेतृत्व की भूमिका निभाती हैं तो वे संवेदनशीलता और दृढ़ता के साथ समाज में सकारात्मक बदलाव की नई दिशा तय कर सकती हैं।
*एसडीएम नानपारा मोनालिसा जौहरी की कार्यशैली के संबंध में कुछ प्रमुख बातें*
▪ जनता के बीच भरोसे का नाम बनीं एसडीएम मोनालिसा
▪ जहां भी रही तैनाती, वहां प्रशासनिक सख्ती और व्यवस्था मजबूत
▪ अवैध अतिक्रमण और अवैध गतिविधियों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई से बनाई पहचान
▪ संवेदनशीलता और सख्त प्रशासन का संतुलन उनकी कार्यशैली की पहचान
▪ जनसंवाद और समस्याओं के त्वरित समाधान को देती हैं प्राथमिकता
▪ निष्पक्ष और पारदर्शी प्रशासन से जनता का जीता विश्वास।
▪ जहां-जहां भी रहीं तैनात वहां उन्होंने अपनी बनाई एक अलग पहचान।
▪ सूबे के मा. मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी भी कर चुके हैं मोनालिसा जौहरी की कार्यशैली की सराहना।






