मुजफ्फरनगर। हिन्दुस्तान सिटी न्यूज

नुमाईश मैदान में आयोजित रोजगार मेले में भाकियू अ. के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेन्द्र मलिक ने मुख्यमंत्री को बायोगैस से घरेलू ईधन की आत्मनिर्भरता पर चर्चा कर प्रदेश में मुख्यमंत्री ग्रामीण बायोगैस मिशन चलाने का दिया सुझाव। आज वैश्विक परिस्थितियों, विशेषकर खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण, देश में घरेलू गैस को लेकर चिंता बढ़ रही है।
लेकिन हमारे गांवों का किसान इस चुनौती का समाधान खुद तैयार कर रहा है।


जनपद मुजफ्फरनगर में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के सहयोग से
300 से अधिक बायोगैस प्लांट सफलतापूर्वक संचालित हैं,
जो किसानों को ऊर्जा के साथ-साथ आर्थिक मजबूती भी दे रहे हैं।

एक बायोगैस प्लांट से किसान को सालाना लगभग ₹27,600 का सीधा लाभ मिल रहा है—
एक प्लांट से एक महीने में 22-24 किग्रा गैस मिलती है
यह लगभग 1.5 LPG सिलेंडर/महीना के बराबर है
👉 बचत:
1.5 सिलेंडर ~ ₹1300
सालाना बचत = ₹15,600
प्रत्येक दिन जैविक खाद 40-50 किलोग्राम (गिली )
सलाना लाभ लगभग 12,000
कुल लाभ = 15,600 +12,000 =27,600
लाभ
जिसमें घरेलू गैस की बचत और जैविक खाद दोनों शामिल हैं।
इस स्तर पर यह मॉडल जनपद में करोड़ों रुपये की अर्थव्यवस्था खड़ी कर रहा है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि
मुजफ्फरनगर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ना, धान, गेहूं के अवशेष, प्रेसमड और पशुधन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं
जो इस मॉडल को पूरे प्रदेश में लागू करने की अपार संभावनाएं पैदा करते हैं।
गांव स्तर पर प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाए। कृषि योजनाओं से जोड़ा जाए
“किसान अब केवल अन्नदाता नहीं, ऊर्जादाता बनने को तैयार है।”
सरकार के नीतिगत समर्थन से उत्तर प्रदेश
ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में देश का अग्रणी राज्य बन सकता है।
उत्तर प्रदेश में बायोगैस प्लांट की बहुत बड़ी संभावनाएँ हैं क्योंकि यहाँ कच्चा माल, सरकारी समर्थन और बाजार तीनों उपलब्ध हैं। यदि सही तरीके से विकास किया जाए तो UP भारत का सबसे बड़ा बायोगैस केंद्र बन सकता है।
उत्तर प्रदेश में पशुधन, कृषि अवशेष और सरकारी योजनाओं के कारण बायोगैस उत्पादन की अत्यधिक संभावनाएँ हैं। यह राज्य भारत की लगभग 24% बायोगैस क्षमता रखता है और भविष्य में बायोगैस उत्पादन का प्रमुख केंद्र बन सकता है।






