मुजफ्फरनगर। हिन्दुस्तान सिटी न्यूज

किसानों की राजधानी सिसौली में चार दिवसीय कार्यशाला का आयोजन होने जा रहा है। जिसमें कर्ज़ माफी नही, कर्ज मुक्ति आत्मनिर्भर कृषि आत्मनिर्भर भारत पद्मश्री डॉ सुभाष पालेकर जी द्वारका प्रकृतिक पद्धति खेती 22, 23, 24, 25 मार्च 2026 को चार दिवसीय कार्यशाला का आयोजन होगा।

उत्तर प्रदेश में भारतीय किसान यूनियन द्वारा किया जा रहा हैं
1) संपूर्ण शतप्रतिशत स्वदेशी होनेवाली सुभाष पालेकर कृषि के माध्यम से एक देशी गोमाता के गोबर गोमूत्र से दस से पंद्रह एकड़ खेती बगैर कोई खाद डाले, बिना जहरीली दवा का छिड़काव , सिर्फ दस प्रतिशत सिंचाई के पानी से,देशी बीजों से और देशी गोमाता से कैसे खेती करना है?
2) देशी गोमाता से ग्रामीण अर्थ व्यवस्था को संपूर्ण स्वदेशी आत्मनिर्भर सुभाष पालेकर कृषि से कैसे साकार करना है ?
3).उससे एक एकड़ भूमि में पालेकर फूड फॉरेस्ट पंच स्तरीय बागवानी मॉडल से परिवार की आर्थिक आत्मनिर्भरता एवं भोजन आत्मनिर्भरता कैसी प्राप्त कर सकते है और रोग मुक्त, कृषि कर्ज मुक्त, शोषण मुक्त मानवी जीवन किसान कैसे प्राप्त कर सकता है ?
4) गांव छोड़कर शहर भाग रहे बेरोजगार युवाओं को गांव में पालेकर फूड फॉरेस्ट पंच स्तरीय बागवानी मॉडल के द्वारा स्थानिक रोजगार कैसे उपलब्ध करना है ? ,
5). सुभाष पालेकर कृषि, यौगिक कृषि से और अन्य कृषि तकनीकों से कैसे पूरी तरह अलग हैं ?
6). सुभाष पालेकर कृषि क्या हैं, कैसी करनी है ? सुभाष पालेकर कृषि में धान, गेहूं, सभी मिलेट, सरसों, गन्ना, सब्जियां, कपास, मूंगफली, मूंग, उड़द, अरहर, सोयाबीन,और अन्य फसलों को कैसे ले?.
7) सुभाष पालेकर कृषि को छोड़ कर अन्य शेष सभी कृषि पद्धतियां जैसे प्रचलित विदेशी पाश्चात्य रासायनिक खेती, विदेशी जैविक खेती, विदेशी गो आधारित खेती, विदेशी वैदिक कृषि, और अन्य कृषि तकनीक वास्तव में जीव जमीन पानी पर्यावरण जैव विविधता इन प्राकृतिक संसाधनों का विनाश कैसे कर रही हैं,?
8) ये तमाम कृषि पद्धतियां कैसे वैश्विक तापमान वृद्धि एवं जल वायु परिवर्तन को बढ़ावा दे रही हैं, भूमि की उर्वरा शक्ति और उत्पादन क्षमता का कैसे विनाश कर रही हैं ?
9), अदृश्य वैश्विक शोषणकारी साहूकारी लुटेरी अर्थ व्यवस्था किसानों को कैसे कर्ज के और आत्महत्या के चक्र व्यूह में जबरन फंसा रही है ?
10). सुभाष पालेकर कृषि में कैसे कोई भी मानव निर्मित खाद डालने की बिलकुल आवश्यकता नहीं हैं, सिर्फ दस प्रतिशत पानी से खेती होती हैं, लागत मूल्य न्यूनतम और जहर मुक्त उपज होने से दाम डेढ़ गुने, किसानों की आय दुगुनी,उपज में घट नही , वैश्विक मांग, वैश्विक बाजार मुट्ठी में लेने की संभावना, यह कैसे ?
11).गांव का पैसा और सम्पत्ति गांव में रहेगी, गांव का पैसा सम्पत्ति शहर और विदेश नहीं जाएगी, बल्कि शहर का और विदेश का पैसा सम्पत्ति गांव आयेगी, कैसे ?
12) आत्मनिर्भर कृषि पर आधारित आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थ व्यवस्था के माध्यम से भारत को आत्मनिर्भर कैसे बनाना है ? …
…इन विषयो पर वैज्ञानिक कसौटियों पर विश्लेषण एवं समीक्षा और शाश्वत समाधान सुनने हेतु….चार दिवसीय निवासी कार्यशाला का सुवर्ण अवसर ….प्रदान किया जा रहा
कार्यशाला मे हर रोज सुबह 8.30 से शाम 8.30 बजे तक लगातार चलेगा, सिर्फ जलपान के पंद्रह मिनिट के दो अवकाश और मध्यान्ह भोजन का एक घंटे का अवकाश मिलेगा!
विषय … संपूर्ण भारत में किसानों के हित में व्यवस्था के विरोध में भव्य जन आन्दोलन खड़े करने वाले तीन महत्वपूर्ण महान किसान नेता हो गए हैं …..
1- उत्तर भारत में भारतीय किसान यूनियन के निर्माता किसान देवता स्व बाबा चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत जी,
2- दक्षिणी भारत में कर्नाटक राज्य रैयत संघ के निर्माता स्व प्रोफेसर नंदजूनड स्वामी जी,
3- महाराष्ट्र में शेतकरी संघटना के निर्माता स्व शरद जोशी जी। विगत पचास वर्षों से ये किसान आंदोलन निरंतर जारी है! किसान संगठन जी जान से पूरी शक्ति से लड़ रहे है लेकिन किसानों की समस्याओं का शाश्वत समाधान अभितक किसानों को नहीं मिल पाया है। इसका कारण है, शोषण और भ्रष्टाचार आधारित पाश्चात्य शोषणकारी अवैज्ञानिक विनाशकारी अर्थ व्यवस्था, किसानों की और ग्रामीण अर्थ व्यवस्था की भयावह लूट करने वाली विदेशी अफ्रीकन परंपरागत खेती, विदेशी यूरोपियन जैविक खेती, विदेशी अमेरिकी रासायनिक खेती, लुटेरी बाजार नियंत्रण व्यवस्था, विश्व व्यापार संगठन की किसान विरोधी नीति, वैश्विक टैरिफ महायुद्ध, वैश्विक तापमान वृद्धि एवं जल वायु परिवर्तन से बढ़ती मात्रा में हो रहा कृषि फसलों का विनाश और प्राकृतिक स्त्रोतोंका विनाश, गांव से हो रहा मजदूरों का और किसानों का पलायन, किसानों के कृषि उपज का दाम लागत मूल्य से आधा मिलना, और भ्रष्टाचार का तेजी से फैल रहा कैंसर, जो किसान और सरकार के बीच में खड़ा है, ये तमाम समस्याएं गरीब और अमीर के बीच के दरार को निरंतर बढ़ा रही हैं। इस शोषण का सबसे अधिक शिकार किसान बन गया है। किसानों का और ग्रामीण अर्थ व्यवस्था के उच्चतम शोषण से ही किसी भी देश के अर्थ व्यवस्था का वृद्धि दर growth rate of economy बढ़ता है। सुभाष पालेकर कृषि से इस समस्याओं का कैसे शाश्वत समाधान मिल सकता, उसकी इस कार्यशाला मे गहन चर्चा होगी।
देश के 25 करोड़ छोटे किसान बैंक और साहूकारों के कर्ज के पहाड़ के नीचे दबकर आत्महत्या की ओर तेजी से प्रस्थान कर रहे हैं, खेती बहुत घाटे में चल रहे हैं ,माने ये 25 करोड़ गरीब किसान भी दरिद्रता रेखा below poverty line के नीचे जी रहे हैं। देश के कुल जन संख्या का तीन चौथाई माने 105 करोड़ किसान दरिद्रता रेखा के नीचे जी रहे हैं, यह गरीब भारत है। भारत के लोगों की प्रति व्यक्ति सालाना आय दुनिया के 138 देशों के लोगों के प्रति व्यक्ति आय से कम है।
इसका अर्थ है कि हमारा देश दो हिस्सों में बंट गया है.. Rich India और गरीब भारत। इन दोनों के बीच में होनेवाली दरार विशालकाय अजगर के समान है, प्रचलित पाश्चात्य अर्थ व्यवस्था से यह दरार दिनोदिन और बढ़ने वाली हैं। जब तक दुनिया में यह एडम स्मिथ की शोषणकारी अवैज्ञानिक अप्राकृतिक विदेशी पाश्चात्य अर्थ व्यवस्था जारी रहेगी, तब तक इस दरार को मिटाना सपने में भी संभव नहीं हैं
इन्हीं सब डरावने दूषित समय से किसानो को बचाने के लिये कोशिश माननीय राकेश टिकैत वैश्विक किसान संरक्षक जी द्वारा समय समय पर की जाती है ऐसा ही एक प्रयास किसान भविष्य को संरक्षित रखने के लिये किया जा रहा हैं।






