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स्थानान्तरण के नाम पर सिंचाई विभाग उडा रहा स्थानान्तरण नीति की धज्जियां

लखनऊ।
इलेक्ट्रिकल एण्ड मैकेनिकल डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ के महासचिव इं. गोपी कृष्ण ने बताया कि सिंचाई (यांत्रिक) विभाग में अधिकारियों द्वारा स्थानान्तरण नीति का घोर उल्लंघन करते हुए जूनियर इंजीनियर्स को नानाप्रकार से उत्पीडि़त किया जा रहा है।
संघ के (अध्यक्ष) इं० गजेन्द्र कुमार ने अवगत कराया कि विभाग द्वारा समूह ‘ग’ के 10 प्रतिशत स्थानान्तरण किये जाने हैं। वर्तमान में 1270 जूनियर इंजीनियर (यां०) विभाग में कार्यरत हैं जिसमें से 40 से अधिक जूनियर इंजीनियर (यां०) या उनके आश्रित की गम्भीर बीमारी व चिकित्सा के दृष्टिगत स्थानान्तरण का अनुरोध किया था जिसे विभाग द्वारा पूर्णतया दर किनार कर दिया गया है, साथ ही ऐसे जू० इंजीनियर्स को सूची में स्थान दिया गया है जिनकी सेवानिवृत्ति में 02 वर्ष से कम समय शेष है। यहां तक कि संघ के जनपद अध्यक्ष एवं सचिव जिनका निर्वाचन तिथि से दो वर्ष से भी कम का कार्यकाल है। उन्हें भी स्थानान्तरण नीति के प्राविधानों के अनुरूप संरक्षण प्रदान करने के स्थान पर स्थानान्तरण की विभाग तैयारी में है। विभाग का यह कृत्य स्थानान्तरण नीति में निहित प्राविधानों के विपरीत पूर्णतया विपरीत है। इं० राज कुमार गुप्ता (कार्यकारी अध्यक्ष) ने अवगत कराया कि पति/पत्नी के राजकीय सेवा में होने के कारण एक ही नगर/जनपद में पदस्थापना किये जाने, आकांक्षी जनपदों में 02 वर्ष से अधिक सेवा अवधि पूर्ण होने वाले एवं गत वर्ष विकल्प चयन हेतु तैयार की गयी सूची जिसकी कांउसलिंग नहीं हो सकी थी, के संबंध में विभाग द्वारा आश्वस्त किया गया था कि जब भी स्थानान्तरण की कार्यवाही की जायेगी। तो प्राथमिकता के आधार पर इन 44 जूनियर इंजीनियर्स को भी सम्मिलित किया जायेगा, किन्तु इन्हें भी सम्मिलित नहीं किया गया है। विभाग द्वारा जूनियर इंजी० के उत्पीड़न के उद्देश्य से मनमाना रवैया लगातार अपनाया जा रहा है। इं० गोपी कृष्ण (महासचिव) ने उपरोक्त तथ्यों का समर्थन करते हुए अवगत कराया कि वर्तमान स्थानान्तरण नीति कार्मिकों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए शासन द्वारा जारी गयी है। जिसमें आकांक्षी जनपद वाले कार्मिकों को छोड़कर अन्य हेतु समय सीमा का कोई निर्धारित नहीं किया गया है, बशर्ते संबंधित खण्ड में रिक्त पद उपलब्ध हो। संबंधित जनपद में पद रिक्त होने के उपरान्त भी इन प्रकरणों का कोई संज्ञान न लिया जा रहा है जो मुख्यमंत्री की जीरो टालरेंस, एवं पारदर्शिता के सिद्धान्त के ठीक विपरीत है। विभागीय अधिकारियों द्वारा बात करने से मना कर दिया जा रहा है तथा कुछ भी सुनने को तैयार नहीं है। बार-बार मनमाने तरीके स्थानान्तरण सूची प्रकाशित किये जाने से यह स्पष्ट परिलक्षित होता है कि स्थानान्तरण प्रक्रिया में विभागीय उच्चाधिकारी पूरी तरह से भ्रष्टाचार में लिप्त होकर अपने निहित स्वार्थों एवं संवर्ग के प्रति उत्पीड़नकारी गतिवधियों को बेहिचक निडर होकर अंजाम दे रहे हैं। इं० सतीश कुमार वार्ष्णेय (संगठन सचिव) ने बताया कि स्थानान्तरण को लेकर संघ द्वारा निख्तर विभाग से वार्ता हेतु समय प्रदान करने का अनुरोध किया जा रहा है, किन्तु विभाग द्वारा न ही वार्ता का समय प्रदान किया गया और न ही संघ की बातों को माना जा है। परिणामस्वरूप शासनादेशों/ प्राविधानों की उपलब्धता होते हुए भी, अनेकों जूनियर इंजीनियर्स अत्यन्त पीड़ाग्रस्त होने को बाध्य है।

 

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