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बाल विवाह कराने पर 2 साल की सजा, 1 लाख रूपये तक जुर्माना

मुजफ्फरनगर। हिन्दुस्तान सिटी न्यूज

जिला प्रोबेशन अधिकारी  संजय कुमार ने बताया है कि किसी भी बालिका, जिसने अपनी आयु 18 वर्ष पूर्ण न की हो एवं किसी भी बालक/बुवा जिसने अपनी आयु 21 वर्ष पूर्ण न की हो, का विवाह कराया जाना प्रतिवन्धित है। वाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के अन्तर्गत बाल दिवाह एक दण्डनीय अपराध है तथा बाल विवाह में प्रतिभाग करने वाले व्यक्तियों पर भी कानूनी कार्यवाही का प्राविधान किया गया है। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के प्राविधानों के अन्तर्गत बाल विवाह कराने वाले व्यस्क पुरूष के लिए एवं बाल विवाह का अनुष्ठान कराने वाले व्यक्तियों के लिए 02 वर्ष के कठोर कारावास या/एवं 01 लाख रूपये तक के जुमाने का प्राविधान है। बाल विवाह एक सामाजिक कुरीति है जिसके शारीरिक एवं मानसिक रूप से गम्भीर दुष्प्रभाव होते हैं।

अक्षय तृतीया (आखा तीज) के अवसर पर बाल विवाह करने की रूढ़िवादी परम्परा समाज में प्रचलित रही है। वर्ष 2026 में अक्षय तृतीया 19 अप्रैल, 2026 को पड़ रही है। बाल विवाह की रोकथाम हेतु जनपद में विभिन्न प्रकार के जन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किये जाने के निर्देश दिये गये हैं।

बाल विवाह कराने में सन्मिलित व्यक्तियों के विरूद्ध नियमानुसार कानूनी कार्यवाही की जायेगी। वैवाहिक आयोजन कराने वाले प्रिन्टिंग प्रेस, टेन्ट व्यवसायी, मैरिज हॉल, बैण्ड बाजा, कैटरर्स, फोटो ग्राफर, पुरोहित, मौलवी इत्यादि व्यक्तियों एवं संस्थाओं से भी यह अपेक्षा की जाती है कि वैवाहिक आयोजन कराने से पूर्व यह सुनिश्चित कर लें कि वधु की आयु 18 वर्ष एवं वर की आयु 21 वर्ष से कम न हो। जनपद के सभी सम्मानित व्यक्तियों से यह भी अनुरोध किया जाता है कि यदि बाल विवाह से सम्बन्धित कोई प्रकरण उनके संज्ञान में आता है तो प्रकरण के सम्बन्ध में तत्काल 112 पुलिस हेल्पलाईन नम्बर, 1098 चाइल्ड हेल्पलाईन नम्बर, 181 महिला हेल्पलाईन नम्बर या स्थानीय पुलिस स्टेशन/चौकी को सूचित कर दें, जिससे बाल विवाह को रोका जा सके।

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