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ढाई साल बाद निपटा एक वोट से हार-जीत का मामला, सभासद पारूल मित्तल की हुई जीत

मुजफ्फरनगर। हिन्दुस्तान सिटी न्यूज

वर्ष 2023 में हुए निकाय चुनाव का वार्ड 36 में एक वोट से हार जीत का मामला करीब ढाई साल बाद निपटा है। एडीजे-4 कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में रजनी गोयल की इलेक्शन पिटीशन को निरस्त कर दिया है। वार्ड 36 में भाजपा नेता अचिंत मित्तल की पत्नी पारूल मित्तल ही सभासद बनी रहेंगी।
नगरीय निकाय चुनाव 2023 में वार्ड 36 से हुए मतदान में भाजपा प्रत्याशी पारूल मित्तल को 1777 वोट मिले थे, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी निर्दल प्रत्याशी रजनी गोयल को 1776 वोट प्राप्त हुए थे। तीसरी प्रत्याशी सोनिया को 31 मत मिले थे। कुल 8479 पंजीकृत मतदाताओं में से 49.39 प्रतिशत ने मतदान किया था। कुल 3667 मतों की मतगणना के दौरान 69 वोट खारिज कर दिए गए थे। विधि मान्य 3598 मतों में मात्र एक वोट के अंतर से पारूल मित्तल को विजेता घोषित किया गया। मतगणना के दौरान रजनी गोयल के पति दीपक गोयल और समर्थकों ने धांधली के आरोप लगाए थे। उसी समय रि-काउंटिंग की मांग की थी, जिसे प्रशासन ने स्वीकार नहीं किया। मतगणना के दौरान हंगामे, धांधली के आरोपों और रि-काउंटिंग की मांग के बीच यह विवाद कोर्ट की दहलीज तक पहुंचा गया। शुक्रवार को एडीजे-4 कोर्ट के न्यायाधीश कनिष्क कुमार ने विस्तृत सुनवाई के बाद फैसला सुनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता अपने दावों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत करने में असफल रहे। कोर्ट ने यह भी कहा कि जिला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष भी ऐसा कोई अभिलेख या आपत्ति दर्ज नहीं पाई गई, जिससे मतगणना में त्रुटि सिद्ध हो सके। कोर्ट से आये फैसले के बाद दीपक गोयल ने कहा कि हमें अभी निर्णय की ऑर्डर कॉपी नहीं मिली है, लेकिन बताया गया है कि याचिका को साक्ष्यों के अभाव में खारिज किया गया है। सोमवार को हम आदेश की कॉपी प्राप्त करेंगे। हमारा केस मजबूत था। जीत हार एक वोट की थी, इसी कारण हमने रि-काउंटिंग की मांग की थी। कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। भाजपा नेता अचिंत मित्तल ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि रजनी गोयल की ओर से दायर पिटीशन तथ्यात्मक आधार पर नहीं थी। कोर्ट ने साक्ष्यों की कमी के चलते इसे फर्जी, निराधार और असत्यकथन वाला पाया। गवाही में भी याचिकाकर्ता कुछ साबित नहीं कर सके। इसलिए अदालत ने पिटीशन को खारिज किया। पारूल मित्तल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता तेगबहादुर सैनी ने पैरवी की है।

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