मुजफ्फरनगर। हिन्दुस्तान सिटी न्यूज

भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक की सहारनपुर, मेरठ मंडल की बैठक हुई। बैठक में सहारनपुर, मुजफ्फरनगर,शामली, बागपत, हापुड़,बुलंदशहर,मेरठ, गाज़ियाबाद,गौतमबुद्धनगर के जिलाध्यक्ष शामिल रहे। बैठक में किसानों की समस्याओं एवं गन्ने के उचित मूल्य की मांग को लेकर 16 अक्टूबर को प्रदेश भर में जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन करनेकानिर्णयलिया गया।


संगठन के प्रदेश अध्यक्ष हरिनाम सिंह वर्मा ने कहा कि गन्ना किसानों को उनकी बढ़ती उत्पादन लागत, महंगे कृषि आदानों, मजदूरी, सिंचाई और खेती में बढ़ते खर्च के अनुरूप गन्ने का लाभकारी मूल्य मिलना चाहिए।
गन्ना पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। लाखों किसान परिवारों की आजीविका गन्ने की खेती पर निर्भर है, लेकिन खेती की लागत लगातार बढ़ने के बावजूद किसानों की आय और उनकी आर्थिक सुरक्षा का सवाल गंभीर बना हुआ है। किसानों को केवल गन्ने का मूल्य घोषित कर देने से राहत नहीं मिलेगी, बल्कि मूल्य निर्धारण में वास्तविक लागत, किसान के श्रम, कृषि जोखिम और परिवार की आर्थिक जरूरतों को भी ध्यान में रखना होगा।
धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि आज किसान संगठन किसानों की ताकत को गैर किसानों के मुद्दों पर लगा रहे है। भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन में किसान संगठनों की भागीदारी पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि किसान संगठनों का मूल उद्देश्य किसानों के अधिकारों और आर्थिक हितों से जुड़े मुद्दों को उठाना है। उन्होंने कहा कि ऐसे आंदोलनों में भागीदारी से पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि उनका किसानों की समस्याओं से क्या प्रत्यक्ष संबंध है।उन्होंने कहा कि किसी भी संवैधानिक पदाधिकारी के संबंध में इस्तीफे की मांग करना राजनीतिक और लोकतांत्रिक विमर्श का हिस्सा हो सकता है, लेकिन किसान संगठनों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि ऐसे आंदोलन में शामिल होने का उनका घोषित किसान-हितैषी उद्देश्य क्या है। उनके अनुसार, किसान संगठनों की स्वतंत्र पहचान तभी बनी रह सकती है, जब वे किसी भी राजनीतिक या गैर-किसानी एजेंडे पर निर्णय लेने से पहले किसानों के हितों को सर्वोपरि रखें।
भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के आगरा मंडल अध्यक्ष अध्यक्ष सरकार को गन्ने के मूल्य के सवाल को केवल चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति तक सीमित नहीं रखना चाहिए। किसान पूरे वर्ष फसल तैयार करने में पूंजी, मेहनत और समय लगाता है तथा मौसम, बीमारी और उत्पादन संबंधी जोखिम भी उठाता है। इसलिए गन्ने का मूल्य ऐसा होना चाहिए, जिससे किसान अपनी लागत निकालने के साथ सम्मानजनक आय भी प्राप्त कर सके।
संगठन ने स्पष्ट किया कि गन्ना किसानों के हितों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 16 अक्टूबर को जिलाधिकारी कार्यालय पर होने वाले प्रदर्शन के माध्यम से सरकार और प्रशासन तक किसानों की मांगें पहुंचाई जाएंगी तथा गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य घोषित करने सहित किसानों की समस्याओं के समाधान की मांग की जाएगी।
भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक ने किसानों से आह्वान किया है कि वे 16 अक्टूबर को जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर अपने हक की आवाज बुलंद करें और गन्ना किसानों के हितों की लड़ाई को मजबूत बनाएं।
बैठक में बागपत के जिलाध्यक्ष सहदेव सिंह,हापुड़ के जिलाध्यक्ष पवन हून, बुलंदशहर के जिलाध्यक्ष शैलेन्द्र आर्य, गाजियाबाद के युवा जिलाध्यक्ष मनोज त्यागी, गौतमबुद्धनगर के जिलाध्यक्ष दया प्रधान, सहारनपुर के जिलाध्यक्ष सुदेशपाल सिंह,शामली के जिलाध्यक्ष रवीन्द्र राणा, मुजफ्फरनगर के जिलाध्यक्ष सुधीर पंवार, जगपाल सिंह प्रदेश उपाध्यक्ष, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के अध्यक्ष महेंद्र मुखिया,शानूर राणा,विनीत त्यागी गाज़ियाबाद जी सहित जनपद के सैकड़ों पदाधिकारी शामिल रहे।






